पूर्णिया में पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायरॉइड के मामले ज्यादा

विश्व थायरॉइड दिवस आज

विश्व थायरॉइड दिवस आज

जिले में बीस फीसदी महिलायें कम थायरॉक्सीन लेवल की समस्या से पीड़ित

पूर्णिया. आज समाज का हर व्यक्ति अपने मकसद के पीछे इस कदर भागदौड़ और आपाधापी में लगा है कि अपने स्वास्थ्य के प्रति अनदेखी का शिकार हो रहा है. कार्य के बोझ से असमान्य दिनचर्या, गलत खान पान, रहन सहन और अत्यधिक मानसिक तनाव आदि ने कुछ प्रत्यक्ष तो कुछ परोक्ष स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दिया है. जिस वजह से हायपर टेंशन, शुगर, हार्ट, किडनी इन सब समस्याओं के अलावा कुछ हारमोनल असंतुलन के भी मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं. मानव शरीर में प्राकृतिक रूप से विभिन्न प्रकार के हार्मोन अलग अलग प्रकार के प्रभाव के लिए जाने जाते हैं और मानव शरीर को पूर्णता की ओर ले जाते हैं. लेकिन किसी भी वजह से इनकी तकनीकों में जब कोई व्यवधान उत्पन्न होने लगते हैं तो उसके लक्षण मानव शरीर पर साफ़ तौर पर प्रकट होने लगते हैं.थायरॉइड से जुडी समस्या भी इसी प्रकार की है. अगर आंकड़ों की बात की जाय तो राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के सेंट्रल पैथलोजी में जहां कुछ माह पूर्व तक प्रत्येक महीने लगभग 5 सौ से 6 सौ मरीजों में थायरॉइड फंक्शन टेस्ट टी थ्री, टी फोर और टीएसएच जांच की अनुशंसा की जा रही थी वहीं मई माह में इसकी संख्या में जबर्दस्त इजाफा हुआ है और यह प्रति दिन लगभग 150 से 200 के बीच पहुंच गया है. जीएमसीएच के चिकित्सकों का कहना है कि यहां पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायरॉइड के मामले ज्यादा हैं. आमतौर पर अगर पुरुषों से इसकी आनुपातिक तुलना की जाय तो लगभग 10 प्रतिशत से अधिक है. वहीं महिलाओं के गर्भकाल में यह असंतुलन, होने वाले बच्चे को प्रभावित कर सकता है. इस वजह से भी जीएमसीएच में आने वाली सभी गर्भवती महिलाओं के लिए यह जांच जरुरी कर दी गयी है.

अनेक प्रकार के होते हैं लक्षण

जब शरीर में थायरॉइड का प्रवाह असंतुलित हो जाता है तो कई तरह के लक्षण दीखते हैं. इन लक्षणों में मुख्य रूप से वजन का बढना या वजन का कम हो जाना, हमेशा थकान महसूस होना, स्वभाव में चिडचिडापन का आ जाना, एकाग्रता या यादाश्त में कमी, डिप्रेशन. इनके अलावा गले में बढे हुए थायरॉइड की वजह से गलगंड रोग होना आदि. ऐसे मामलों में आयोडीन की कमी मुख्य रूप से जिम्मेदार है. अगर जांच में थायरॉइड से सम्बंधित किसी भी तरह की परेशानी सामने आये तो इलाज बेहद जरुरी है अन्यथा धीरे धीरे मानव शरीर को बेहद नुकसान पहुंचता है.

बोलीं चिकित्सक

हिमालय की तलहटी वाले क्षेत्रों में रहने वालों में आयोडीन की कमी की शिकायत ज्यादा है. पानी में आयरन और खान पान पर ध्यान नहीं देना भी आयोडीन की कमी के लक्षण हो सकते हैं. जीएमसीएच में प्रतिदिन 10 में से 2 महिलायें कम थायरॉक्सीन लेवल मामले वाली होती हैं. इससे उनके गर्भधारण में परेशानी, बार बार गर्भपात, सही उपचार नहीं हो तो नवजात में मानसिक विकृति भी आ सकती है.

डॉ ऋचा झा, एचओडी, गायनी विभाग जीएमसीएच

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: SATYENDRA SINHA

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >