पूर्णिया के बनमनखी में बनेगी भूकंपीय वेधशाला, कम तीव्रता वाले भूकंपों को पता लगाना होगा संभव
कम तीव्रता वाले भूकंपों को पता लगाना होगा संभव
लोगों को जागरूक करने के मकसद से ‘भूकंप सुरक्षा पखवाड़ा’का शुभारंभ
पूर्णिया. जिले में भूकंपीय जोखिम को कम करने और आम जनमानस को सुरक्षित रहने के तरीकों से अवगत कराने के लिए गुरुवार को ‘भूकंप सुरक्षा पखवाड़ा’ का शुभारंभ किया गया. यह 28 जनवरी तक चलेगा. जिलापदाधिकारी अंशुल कुमार ने भूकंप सुरक्षा जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.इस अवसर पर अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) एवं एडीएमओ पूर्णिया सहित जिला प्रशासन के वरीय अधिकारी उपस्थित थे.ज्ञातव्य हो कि यह जागरूकता रथ एवं गहन जन-संपर्क कार्य जिला के विभिन्न सुदूर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में भ्रमण कर लोगों को भूकंप सुरक्षा से संबंधित ऑडियो-विजुअल संदेशों और पम्फलेट्स के माध्यम से जागरूक करेगा. इसका मुख्य उद्देश्य आपदा से सुरक्षा, जानकारी में ही है बचाव के संदेश को घर-घर पहुंचाना है. 15 जनवरी से 28 जनवरी के बीच विभिन्न विद्यालयों में बच्चों के बीच जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा. विभिन्न संस्थानों में संगोष्ठी का आयोजन किया जायेगा. इस मौके पर समाहरणालय स्थित महानंदा सभागार में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया.संगोष्ठी में अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) ने जिले की भौगोलिक संवेदनशीलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भूकंप जैसी आपदाओं के समय घबराने की बजाय धैर्य और पूर्व-अभ्यास अधिक कारगर साबित होते हैं. मौके पर अपर समाहर्ता ( विधि व्यवस्था) ने भूकम्प से पूर्व जगरुकता संवेदनशीलता प्रचार प्रसार को सबसे बड़ा एवं कारगर उपाय बताया. एडीएमओ पूर्णिया प्रणव कुमार ने बताया कि पूर्णिया के बनमनखी में भूकंपीय वेधशाला स्थापित की जाएगी.जिला पदाधिकारी के दिशा-निर्देश के आलोक में प्रस्ताव तैयार कर विभाग को भेज दिया गया है. बनमनखी अनुमंडल में भूकंपीय वेधशाला होने से सीमांचल और कोसी दोनों प्रमंडलों को इसका लाभ मिलेगा.संगोष्ठी में शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जीविका,राज्य आपदा मोचन बल, आपदा मित्र, सिविल डिफेंस, रेड क्रॉस के प्रतिनिधि तथा संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे.मॉक ड्रिल में किया गया सुरक्षा मानकों का प्रदर्शन
समाहरणालय परिसर में आयोजित मॉक ड्रिल के दौरान आपदा प्रबंधन विभाग और एसडीआरएफ की टीम ने भूकंप के समय अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों का प्रदर्शन किया. इसमें भूकंप के झटके महसूस होते ही मेज के नीचे छिपने या किसी मजबूत खंभे के पास रहने का अभ्यास, अफरा-तफरी के बिना भवन से बाहर निकलने का सही तरीका और घायलों को तुरंत सहायता पहुंचाने और अस्पताल ले जाने की प्रक्रिया को दर्शाया गया.पूर्णिया समेत कई जिले अब जोन छह और पांच में
हिमालय के करीब और टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन बिंदु पर स्थित होने के कारण भूकंप के लिहाज से बिहार अत्यधिक संवेदनशील है.बिहार का बड़ा हिस्सा (लगभग 80 प्रतिशत) सिस्मिक जोन 4 और 5 (उच्च जोखिम) में आता है. इसी तरह सिस्मिक जोन-5 (उच्चतम जोखिम) वाले जिलों में किशनगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, अररिया, सीतामढ़ी, दरभंगा, मधुबनी, भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर, कटिहार, पूर्णिया शामिल है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
