भक्तों की गहरी आस्था और शांति का केंद्र है रामबाग का 'महावीर मंदिर

पूर्णिया शहर का रामबाग महावीर मंदिर भक्तों की गहरी आस्था और मानसिक शांति का केंद्र है. यहाँ मन्नतें पूरी होने की अटूट मान्यता है, खासकर मंगलवार और शनिवार को भक्तों की भीड़ उमड़ती है.

पूर्णिया शहर के रामबाग प्रोफेसर कॉलोनी स्थित प्रसिद्ध महावीर मंदिर स्थानीय निवासियों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था, भक्ति और मानसिक शांति का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है. शहर में स्थित होने के बावजूद वाहनों के शोर-शराबे से दूर यह मंदिर परिसर अत्यंत शांत और पवित्र वातावरण प्रदान करता है, जहां रोजाना भक्त संकटमोचन हनुमान जी का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

मन्नतें पूरी होने की है अटूट मान्यता

रामबाग प्रोफेसर कॉलोनी के बीचों-बीच स्थित इस मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं में अटूट विश्वास है.

  • मानसिक शांति और पूजा: आम दिनों में भी कॉलोनी और आसपास के लोग सुबह-शाम मंदिर पहुंचकर हनुमान जी की पूजा-अर्चना और पाठ करते हैं.
  • हवन-पूजन अनुष्ठान: मंदिर में समय-समय पर वृहद् हवन-पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है, जिसमें पूरी कॉलोनी के लोग बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से यहां आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है.

मंगलवार और शनिवार को लगती है श्रद्धालुओं की कतार

यूं तो रोजाना मंदिर में सुबह और शाम की आरती के वक्त भक्तिमय माहौल रहता है, लेकिन मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष पूजन का आयोजन होता है:

  • विशेष पूजा-अर्चना: इन दो दिनों में अहले सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी लाइनें लग जाती हैं.
  • चढ़ावा: श्रद्धालु संकटमोचन हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए सिंदूर, नारियल, लाल फूल, तुलसी दल और लड्डू का प्रसाद अर्पित करते हैं.

हनुमान जयंती और रामनवमी पर उमड़ता है जनसैलाब

हनुमान जयंती, रामनवमी और अन्य प्रमुख धार्मिक अवसरों पर मंदिर परिसर का नजारा देखते ही बनता है:

  • भजन-कीर्तन व भव्य आरती: इन अवसरों पर मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है और भव्य भजन-कीर्तन व महाआरती का आयोजन होता है.
  • दूर-दराज से पहुंचते हैं भक्त: केवल प्रोफेसर कॉलोनी ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्णिया शहर और आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु अपने परिवार के साथ यहां मत्था टेकने पहुंचते हैं. पूरा क्षेत्र जय श्री राम और जय हनुमान के जयकारों से गुंजायमान हो उठता है.


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लेखक के बारे में

By अखिलेश चंद्रा

अखिलेश चंद्रा प्रिंट माध्यम में 30 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं.

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