जिला मुख्यालय स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) के विशाल परिसर में अवस्थित श्री राधा-कृष्ण मंदिर आस्था, मानवीय संवेदना और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अद्भुत संगम का जीवंत प्रतीक बना हुआ है. गंभीर से गंभीर बीमारियों से जूझते मरीज और उनके बेबस तीमारदार जब जीवन की जंग लड़ रहे होते हैं, तो एक ओर डॉक्टरों की 'दवा' और दूसरी ओर इस चौखट से मांगी गई 'दुआ' का समन्वय उनकी टूटी उम्मीदों को संबल देता है. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर शुक्रवार को इस मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया है, जहां आज मध्यरात्रि भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्योत्सव पर आस्था का अलौकिक संसार सजेगा.
मरीज, डॉक्टर और तीमारदार मिलकर मनाते हैं जन्मोत्सव
जीएमसीएच परिसर के इस मंदिर में जन्माष्टमी का पर्व हर वर्ष ऐतिहासिक रूप से मनाया जाता है:
- सामूहिक सहभागिता: अस्पताल के वरीय चिकित्सक, रेजिडेंट डॉक्टर्स, मेडिकल छात्र, नर्सिंग स्टाफ और सुरक्षा कर्मियों के साथ-साथ वॉर्ड व आईसीयू में भर्ती मरीजों के परिजन भी इस पूजा में बढ़-चढ़कर शामिल होते हैं.
- दैनिक देखरेख में डॉक्टरों की रुचि: मंदिर की सुबह-शाम की आरती और दैनिक व्यवस्थाओं के संचालन में स्वास्थ्य कर्मियों के साथ-साथ कई वरिष्ठ डॉक्टर व्यक्तिगत रुचि लेकर सहयोग करते हैं.
- मध्यरात्रि में अभिषेक: शुक्रवार और शनिवार की मध्यरात्रि 12 बजे शंखध्वनि और घंटे-घड़ियाल के बीच बाल गोपाल का पंचामृत अभिषेक कर विशेष महाभोग अर्पित किया जाएगा.
सड़क चौड़ीकरण से भव्य मंदिर बनने तक की प्रेरक कहानी
जीएमसीएच परिसर में इस मंदिर के विस्थापन और भव्य पुनर्निर्माण का इतिहास बेहद संघर्षपूर्ण और रोचक रहा है:
- सिक्सलेन निर्माण की जद में आया था मंदिर: कंक्रीट के नए मेडिकल कॉलेज भवनों के निर्माण से पूर्व यह मंदिर तत्कालीन सदर अस्पताल के मुख्य द्वार से सटकर सड़क किनारे स्थित था. जब पूर्णिया शहर में सिक्सलेन सड़क चौड़ीकरण का कार्य शुरू हुआ, तो मंदिर इस परियोजना की जद में आ गया.
- मास्टर प्लान में मिला सम्मानजनक स्थान: रेड क्रॉस सोसाइटी व जिला स्वास्थ्य समिति के तत्कालीन सदस्य राणा सिंह सहित अन्य स्थानीय प्रबुद्धजनों की ठोस पहल पर जीएमसीएच के मास्टर प्लान में संशोधन किया गया. इसके बाद मंदिर को बेहद सम्मानपूर्वक परिसर के भीतर सुरक्षित और सुरम्य स्थल पर पुनर्स्थापित कराया गया.
- संगमरमर के विग्रह: आज यह भव्य मंदिर का रूप ले चुका है, जहां भगवान श्रीकृष्ण अपनी आल्हादिनी शक्ति राधा रानी के साथ संगमरमर के नयनाभिराम विग्रह में विराजमान हैं.
आस्था और विज्ञान का संगम: सकारात्मक ऊर्जा से बढ़ती है 'इच्छाशक्ति'
चिकित्सा जगत और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार यह मंदिर अस्पताल परिसर में सकारात्मक मानसिक ऊर्जा का संचार करता है:
- मनोवैज्ञानिक संबल: आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी इस बात को स्वीकार करता है कि मरीज के स्वास्थ्य लाभ में उसकी मानसिक दृढ़ता और सकारात्मक इच्छाशक्ति की निर्णायक भूमिका होती है.
- चौखट पर आंसू और उम्मीद: समाजसेवी राणा सिंह बताते हैं कि जब कोई परिजन वॉर्ड में तड़प रहे अपने आत्मीय की सलामती के लिए रोता हुआ इस मंदिर की चौखट पर मत्था टेकता है, तो उसे एक असीम मानसिक शांति और नया संबल मिलता है. यह सकारात्मक विश्वास मरीज की रिकवरी में संजीवनी का कार्य करता है.
