हॉस्टल में शराब पार्टी को लेकर बुरी तरह घिरा पूर्णिया विश्वविद्यालय: सुरक्षाकर्मियों की मुस्तैदी पर उठे सवाल

Purnia University: बिहार में पूर्ण शराबबंदी के दावों के बीच पूर्णिया विश्वविद्यालय (Purnia University) के कैंपस में एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है. प्रशासनिक भवन की नाक के नीचे स्थित पीजी हॉस्टल में रातभर सरेआम शराब पार्टी चलती रही, जिसके बाद उत्पाद विभाग की टीम ने एक रसूखदार छात्र नेता को नशे की हालत में दबोच लिया है. इस घटना ने विश्वविद्यालय की सुरक्षा और साख पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Purnia University: पूर्णिया विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन और पोस्ट ग्रेजुएट (PG) विभाग के ठीक बीचो-बीच स्थित छात्र हॉस्टल इन दिनों पढ़ाई के बजाय जाम छलकने को लेकर सुर्खियों में है. हॉस्टल के अंदर शाम ढलते ही शराब की महफिल सजने और एक नामचीन छात्र नेता के अत्यधिक नशे की हालत में पकड़े जाने के बाद से विवि प्रशासन चौतरफा दबाव में आ गया है. हैरान करने वाली बात यह है कि विवि के शीर्ष अधिकारियों की मौजूद्गी और चौबीसों घंटे सुरक्षा गार्डों का पहरा होने के बावजूद हॉस्टल के कमरों तक शराब की बोतलें कैसे पहुंचीं और इस हुड़दंग की भनक अधिकारियों को क्यों नहीं लगी? इस गंभीर लापरवाही को लेकर छात्र संगठनों और आम जनता के बीच गहरा आक्रोश व्याप्त है.

विवि प्रशासन की कार्यशैली पर खड़े हो रहे ये 4 बड़े सवाल

कैंपस के भीतर इस तरह की अवैध गतिविधि के उजागर होने के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है, जिससे जुड़े मुख्य सवाल निम्नलिखित हैं:

  • गार्ड्स की भूमिका: जब हॉस्टल के कमरे में ऊंचे सुर में गाने बज रहे थे और शराब पार्टी चल रही थी, तब विवि के सुरक्षाकर्मी कहां सो रहे थे?
  • सुरक्षा में सेंध: कड़े पहरे वाले विवि परिसर के अंदर प्रतिबंधित शराब लेकर आने की हिम्मत किसने जुटाई और इसका मुख्य सप्लायर कौन है?
  • सिंडिकेट की जांच: उत्पाद विभाग की छापेमारी के दौरान पकड़े गए छात्र नेता के अलावा उस महफिल में और कितने रसूखदार लोग या बाहरी छात्र शामिल थे, जो अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले?
  • कार्रवाई या लीपापोती: सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि क्या विवि प्रशासन इस बार सुरक्षा में चूक की जिम्मेदारी तय करते हुए कोई बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा या हर बार की तरह मामले को रफा-दफा (लीपापोती) कर दिया जाएगा?

करीब तीन दर्जन सुरक्षाकर्मी हैं तैनात; प्रशासनिक भवन से साफ दिखता है हॉस्टल

इस पूरे सनसनीखेज मामले की कड़ियों पर जब पूर्णिया विवि के कुलानुशासक (Chief Proctor) प्रो. यू.एन. सिंह से पहली प्रतिक्रिया ली गई, तो वे जिम्मेदारी लेने से पूरी तरह बचते नजर आए. उनका तर्क था कि परिसर में तैनात किसी भी गार्ड ने उन्हें इस तरह के हो-हंगामे की कोई पूर्व सूचना नहीं दी थी.

कुलानुशासक का यह दावा इसलिए गले नहीं उतर रहा है, क्योंकि:

  1. भौगोलिक निकटता: जिस हॉस्टल में शराब पार्टी चल रही थी, वह प्रशासनिक भवन से महज कुछ कदमों की दूरी पर है और वहां से साफ दिखाई देता है.
  2. 24 घंटे पहरा: प्रशासनिक भवन, परीक्षा विभाग, कुलपति (VC) आवास और निर्माण स्थलों की सुरक्षा के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से करीब तीन दर्जन (36) हथियारबंद और लाठीधारी सुरक्षाकर्मी तीन शिफ्टों में तैनात रहते हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब हॉस्टल के भीतर मचे हुड़दंग की आवाज विवि परिसर को पार कर जिला उत्पाद विभाग (Excise Department) तक पहुंच गई और टीम ने आकर छापेमारी कर दी, तो यह नामुमकिन है कि वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों को इसकी भनक न लगी हो.

विवि की साख पर लगा बट्टा; अब कड़े एक्शन का इंतजार

कैंपस में हड़कंप: शिक्षा के मंदिर में इस तरह की अराजकता और नशाखोरी ने पूर्णिया विश्वविद्यालय की गरिमा को ठेस पहुंचाई है. यदि समय रहते बाहरी तत्वों का प्रवेश हॉस्टल में बंद नहीं किया गया, तो छात्र उग्र आंदोलन करेंगे.

इस शर्मनाक घटना के बाद विश्वविद्यालय के अकादमिक माहौल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. प्रबुद्ध नागरिकों और अभिभावकों ने कुलपति से मांग की है कि हॉस्टल के वार्डन और मुख्य सुरक्षा अधिकारी को तत्काल प्रभाव से कारण बताओ नोटिस (शोकॉज) जारी किया जाए. अब देखना यह होगा कि उत्पाद विभाग की इस कानूनी कार्रवाई के बाद विवि प्रशासन आरोपी छात्र नेता का नामांकन रद्द करने और सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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