जेल से निकलने के बाद रोजगार का हुनर, पूर्णिया केंद्रीय कारा के 30 बंदी सीखेंगे मशरूम उत्पादन

पूर्णिया केंद्रीय कारा में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल के तहत 10 दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण शुरू हुआ है. एसबीआई आरसेटी के तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण में 30 कैदी शामिल हैं, जो मशरूम उत्पादन की तकनीक सीखेंगे और सजा पूरी करने के बाद स्वरोजगार के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे.

Mushroom Training in Purnia Central Jail: जेल की चारदीवारी के भीतर अब 30 बंदी ऐसा हुनर सीख रहे हैं, जिसे सजा पूरी होने के बाद वे रोजगार और आय का जरिया बना सकते हैं. पूर्णिया केंद्रीय कारा में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल के तहत 10 दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण शुरू किया गया है. प्रशिक्षण पूरा करने के बाद बंदियों को मशरूम उत्पादन की तकनीक और इसे छोटे स्तर पर व्यवसाय के रूप में शुरू करने की जानकारी मिलेगी.

एसबीआई आरसेटी पूर्णिया के तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण में केंद्रीय कारा के 30 बंदी शामिल हो रहे हैं. प्रशिक्षण के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि अग्रणी जिला प्रबंधक दिनेश कुमार दिनकर और आरसेटी निदेशक अमर कुमार ने प्रशिक्षणार्थियों को मशरूम उत्पादन से स्वरोजगार की संभावनाओं की जानकारी दी.

कम लागत में शुरू हो सकता है मशरूम उत्पादन

प्रशिक्षणार्थियों को बताया गया कि मशरूम उत्पादन अपेक्षाकृत कम लागत में शुरू किया जा सकता है. इसे छोटे स्तर से शुरू कर धीरे-धीरे आय का जरिया बनाया जा सकता है. अधिकारियों ने बंदियों से प्रशिक्षण को गंभीरता और पूरे मनोयोग से लेने की अपील की.

दस दिनों के दौरान बंदियों को केवल मशरूम उगाने की जानकारी ही नहीं दी जायेगी, बल्कि उत्पादन से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक पहलुओं से भी परिचित कराया जायेगा. उन्हें मशरूम उत्पादन की तकनीक, आवश्यक सामग्री, उत्पादन की पूरी प्रक्रिया और रख-रखाव के बारे में प्रशिक्षण दिया जायेगा.

इसके साथ ही तैयार मशरूम को बाजार तक पहुंचाने और उसकी बिक्री से जुड़ी जानकारी भी दी जायेगी. इससे प्रशिक्षण लेने वाले बंदियों को उत्पादन से लेकर बाजार तक की पूरी प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी.

सजा पूरी होने के बाद काम आ सकता है यह हुनर

आरसेटी निदेशक अमर कुमार ने कहा कि कौशल आधारित प्रशिक्षण का उद्देश्य बंदियों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाना है. सजा पूरी करने के बाद उनके पास कोई ऐसा हुनर हो, जिसके माध्यम से वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें, प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य यही है.

मशरूम उत्पादन जैसे कौशल को इसी दृष्टि से प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया है. कम लागत में इसे शुरू करने की संभावना के कारण बंदियों के लिए यह भविष्य में स्वरोजगार का एक विकल्प बन सकता है.

Mushroom Training in Purnia Central Jail: प्रशिक्षण में उत्पादन से बिक्री तक की जानकारी

दस दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान बंदियों को मशरूम उत्पादन से संबंधित जरूरी जानकारी चरणबद्ध तरीके से दी जायेगी. इसमें उत्पादन के लिए जरूरी सामग्री की पहचान, उत्पादन की प्रक्रिया, उचित रख-रखाव और तैयार उत्पाद की बिक्री तक के पहलुओं को शामिल किया गया है.

प्रशिक्षण का जोर व्यावहारिक जानकारी पर है, ताकि बंदी केवल सैद्धांतिक जानकारी लेकर न रहें, बल्कि आगे चलकर सीखे हुए कौशल का इस्तेमाल कर सकें. जेल प्रशासन और आरसेटी की इस पहल का उद्देश्य बंदियों के भीतर रोजगारपरक कौशल विकसित करना है.

प्रशिक्षण के उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय कारा के उपाधीक्षक सुनील कुमार मौर्य, उपाधीक्षक सुधीर कुमार, सहायक अधीक्षक रवि किशन कुमार समेत आरसेटी के संकाय सदस्य माधव चन्द और रजनीकांत तथा कारा प्रशासन के पदाधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे.

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लेखक के बारे में

By अरुण कुमार

अरुण कुमार प्रिंट माध्यम में 32 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक हिन्दुस्तान से की. अभी प्रभात खबर के पूर्णिया कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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