सीमांचल के हृदय स्थली पूर्णिया जिला मुख्यालय में स्थित पंचमुखी महादेव मंदिर शहरवासियों और आसपास के जिलों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए असीम आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. शहर के एसडीओ कोठी के ठीक सामने स्थापित इस पावन शिवालय में दुर्लभ पंचमुखी शिवलिंग प्रतिष्ठापित है. धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे अंतःकरण से भगवान पंचमुखी महादेव का जलाभिषेक और विधिवत पूजन-अनुष्ठान करते हैं, भोलेनाथ उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी कर जीवन के समस्त कष्टों का हरण कर लेते हैं.
सावन के सोमवार को उमड़ता है आस्था का जनसैलाब
सावन के पवित्र महीने में इस मंदिर का आध्यात्मिक परिवेश देखते ही बनता है. विशेषकर प्रत्येक सोमवार को अहले सुबह से ही जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं. हर-हर महादेव और ॐ नमः शिवाय के गूंजते जयघोष से समूचा परिसर भक्तिमय बना रहता है. मंदिर परिसर के अंदर भगवान शिव के पंचमुखी स्वरूप के साथ-साथ जगतजननी माता पार्वती सहित अन्य प्रमुख देवी-देवताओं की भव्य और नयनाभिराम प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जिनके दर्शन पाकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठते हैं.
सुबह के दर्शन और पंचमुखी स्वरूप का आध्यात्मिक महत्व
धार्मिक जानकारों और स्थानीय पुरोहितों के अनुसार प्रातःकाल में पंचमुखी महादेव के दर्शन और पूजन का विशेष फलदायी महत्व है. शास्त्रों में माना गया है कि भगवान शिव का पंचमुखी रूप सृष्टि के पंचतत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का प्रतिनिधित्व करता है. सुबह के समय शिवलिंग का दर्शन व अभिषेक करने से मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है. यही वजह है कि सुबह होते ही यहां शहर के गणमान्य नागरिकों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के श्रद्धालुओं का तांता लग जाता है.
सिक्स लेन के किनारे स्थित होने से सुगम है पहुंच
इस मंदिर की भौगोलिक अवस्थिति भी श्रद्धालुओं के लिए बेहद सुविधाजनक है. मरंगा-गुलाबबाग सिक्स लेन मुख्य मार्ग के बिल्कुल किनारे स्थित होने के कारण यहां स्थानीय लोगों के साथ-साथ मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों और दूर-दराज के यात्रियों के लिए भी रुककर दर्शन-पूजन करना अत्यंत सहज हो जाता है. मंदिर परिसर में नियमित अंतराल पर भव्य भजन-कीर्तन, शिव चर्चा और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता रहता है, जिससे पूरे क्षेत्र में सकारात्मक व आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार बना रहता है.
