बिना लग्न के विवाह, गृह प्रवेश और नए व्यवसाय की कर सकते हैं शुरुआत
पूर्णिया. जाने माने आचार्य पंडित सूरज भारद्वाज के अनुसार, अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को है. इस दिन 10 साल बाद एक बार फिर विशिष्ट योग बन रहे हैं. सूर्य मेष और चंद्रमा कर्क राशि में होंगे. इससे तिथि का प्रभाव 100 गुना बढ़ जाएगा. इसमें दान, पुण्य और तीर्थ दर्शन का विशेष अक्षय फल मिलेगा. साथ ही कोई भी शुभ कार्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होगी. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा होगी. वर्षभर में तीन विशेष मुहूर्तों में एक अक्षय तृतीया भी है. इस तिथि को स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना गया है. नौ मई 2016 को अक्षय तृतीया सोमवार के दिन पड़ी थी. इस बार भी सोमवार को ही पड़ रही है. 10 साल पहले जो योग बने थे, वही योग इस बार भी बन रहे हैं. इसमें सौभाग्य, आयुष्मान, घर और स्थिर योग बन रहे हैं. इसके अलावा त्रिपुष्कर, राजयोग, मालव्य, शुभ और नव योग भी रहेगा. रोहिणी नक्षत्र भी रहेगा. चंद्रमा और सूर्य अपने उच्च राशि में होंगे. पंडित सूरज भारद्वाज ने बताया कि अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को दिन में 1:07 के बाद लग रही है और 20 को दिन में 10:45 तक रहेगी, लेकिन उदय तिथि का मान लेकर 20 को ही अक्षय तृतीया मनाई जाएगी.पूजन का शुभ मुहूर्त:
अक्षय तृतीया पर पूजन के कई मुहूर्त हैं:सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक का मुहूर्त सबसे श्रेष्ठ है.
इसके अलावा दोपहर 1:30 बजे से 3:30 बजे तक.शाम 6:45 बजे से रात 10:55 बजे तक भी पूजन का मुहूर्त है.
दोपहर 2:30 बजे से 3:22 बजे तक विजय मुहूर्त है. यह नया व्यापार या निवेश शुरू करने के लिए उत्तम है.वहीं, शाम 5:15 बजे से 6:50 बजे तक अमृत काल रहेगा.
