पूर्णिया. पूर्णिया विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के तत्वावधान में मंगलवार को ”हिंदी रचना और आलोचना में कोसी क्षेत्र का योगदान” विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गयी. विभागाध्यक्ष प्रो. मनोज पराशर की अध्यक्षता में इस संगोष्ठी में पूर्णिया विद्यालय के कुलसचिव प्रो. अखिलेश कुमार, दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्षडॉ. वीणा रानी, कथाकार रामनरेश भक्त ,डॉ. अनामिका सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित किया. कार्यक्रम का मंच संचालन हिंदी विभाग की शोधार्थी नीतू बाबू ने किया.अतिथियों के स्वागत के लिए स्वागत गीत की प्रस्तुति पूजा झा, रीतिका सिन्हा, श्वेता कुमारी ने की. इस संगोष्ठी में प्रो मनोज पराशर द्वारा लिखित ”लोकप्रिय साहित्य की सामाजिक भूमि और भूमिका” पुस्तक का विमोचन किया गया. इस संगोष्ठी में कोसी अंचल के पूर्णिया विश्वविद्यालय, बीएनमंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के हिंदी शोधकर्ताओं स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं की जबर्दस्त भागीदारी रही. लोकल फोर लोकल को ध्यान में रखते हुए हिंदी साहित्य में कोसी अंचल के रचनाकारों के महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाते हुए शोधार्थियों में नीतू बाबू, मनोज कुमार साह,रीतिका, श्वेता, दीपशिखा, मनी प्रिया, संभव, संगीता,सियाशरण , प्रभाष, पायल, पूजा झा, चंदन, केशव, निधि प्रिया, पूजा कुमारी, काजल ने आलेख पाठ किये. संगोष्ठी में डॉ.वरुण कुमार तिवारी द्वारा रचित कोसी अंचल का सृजनात्मक हिंदी साहित्य कहानी खंड और उपन्यास खंड के संदर्भ में चर्चा की गई. देवेंद्र कुमार देवेश द्वारा लिखित कविता कोसी के पंचम खंड को भी प्रस्तुत किया गया. साथ ही अशोक सिंह तोमर द्वारा लिखित ”कोशिक साहित्यिक संस्कृति : अनुसंधान और आलोचना को भी इस संगोष्ठी में प्रस्तुत किया गया. इन रचनाओं में कोसी अंचल के रचनाकार का इतिवृत्त प्रस्तुत किया गया है.
हिन्दी विभाग में ‘हिंदी रचना व आलोचना में कोसी क्षेत्र का योगदान’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी
पूर्णिया विश्वविद्यालय
