खुले में मटन बेचने पर पाबंदी, फिर भी सड़क किनारे आबाद है बाजार

मटन दुकानों से फैल रही गंदगी और दुर्गंध से प्रदूषित हो रहा वातावरण

मटन दुकानों से फैल रही गंदगी और दुर्गंध से प्रदूषित हो रहा वातावरण

जिम्मेदार विभाग कोई फिक्र नहीं, विक्रेता आदेश मानने को तैयार नहीं

आरंभिक दौर में भले ही चला हो अभियान पर अब किसी को सरोकार नहीं

पूर्णिया. राज्य सरकार ने खुले में मटन बेचने पर पाबंदी लगा रखी है पर इसके बावजूद शहर के चौक चौराहों और सड़क किनारे मटन बाजार आबाद है. आलम यह है कि न तो जिम्मेदार विभाग को इसकी कोई फिक्र है और न ही खुले में मटन बेचने वालों को सरकार का यह आदेश मान्य है. यह अलग बात है कि शहर के आम नागरिकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. वैसे, सरकार का आदेश आने के बाद आरंभिक दौर में पूर्णिया के प्रशासनिक महकमे द्वारा रोकथाम की पहल की गई थी पर फिर कोई अभियान नहीं चलाया जा सका जिससे नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.

गौरतलब है कि बिहार सरकार द्वारा शहरी क्षेत्रों में खुले में मांस और मछली की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है. इसके लिए डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के निर्देशों के आलोक में नगर विकास एवं आवास विभाग ने राज्य के सभी नगर निकायों को आदेश जारी कर रखा है. इस आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि कोई भी दुकानदार सड़क किनारे या खुले स्थान पर मटन टांगकर या प्रदर्शित कर नहीं बेच सकता. बिक्री के लिए दुकान का ढका होना अनिवार्य है. इसके अलावा स्कूल, कॉलेज और मंदिरों के समीप स्थित इस तरह की दुकानों को हटाने या उन्हें पूरी तरह नियमों के दायरे में लाने के निर्देश दिए गए हैं. इतना ही नहीं बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा 345 के तहत केवल लाइसेंस प्राप्त दुकानदार ही मांस-मछली बेच सकेंगे. बिना लाइसेंस चल रही दुकानों को तत्काल बंद करने का निर्देश है.

सरकार और नगर विकास एवं आवास विभाग के आदेश का आलम यह है कि शहर के जनता चौक रेलवे ढाला से आगे, लाइन बाजार डाक बंगला चौक, मधुबनी मंझली चौक, गुलाबबाग सहित अन्य चौक चोराहे पर खुलेआम मांस की बिक्री जारी है. प्रमुख चौक-चौराहों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में आज भी दुकानदार खुले में मुर्गा काटते और मांस बेचते देखे जा रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से शुरुआती चेतावनी तो दी गई थी. इसके बाद कई दुकानों को हटाया गया और जुर्माना भी किया गया था लेकिन इसना कुछ होने के बावजूद दुकानदारों के हौसले बुलंद हैं. हालांकि होली से पहले शहरी क्षेत्र के अलावा नगर पंचायत समेत कई क्षेत्रों में प्रशासन ने अवैध दुकानों को चिह्नित कर कार्रवाई की पहल शुरू की थी पर फिर इसमें सुस्ती आ गई. इसका साइड इफेक्ट यह है कि मांस की दुकानों से निकलने वाली गंदगी और दुर्गंध से वातावरण प्रदूषित हो रहा है. युवा समाजसेवी सत्यम श्रीवास्तव का कहना है कि खुले में मांस बेचने से न केवल धार्मिक और सामाजिक भावनाएं आहत होती हैं बल्कि यह जन-स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा है. धूल, मक्खियों और खुले वातावरण में मांस के दूषित होने की संभावना बढ़ जाती है. जिससे गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं, इसलिए नगर निगम प्रशासन को निरन्तर जांच करने की जरूरत है. कहते हैं नगर आयुक्तशहर में अवैध रूप से चल रही दुकानों को सीज किया जाएगा. नियम तोड़ने वाले दुकानदारों पर जुर्माना किया जाएगा. नगर निगम की गठित टीम नियमित रूप से औचक निरीक्षण करेंगी और कार्रवाई करेगी. कुमार मंगलम, नगर आयुक्त पूर्णिया

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By ARUN KUMAR

ARUN KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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