अदम्य साहस, अटूट आस्था और दृढ़ संकल्प के साथ साइकिल से चारों धाम की यात्रा पर निकले महाराष्ट्र के युवा साइकिल यात्री रिवांश अमरनाथ मिश्रा 203 दिनों का लंबा और चुनौतीपूर्ण सफर तय कर पूर्णिया पहुंचे. शुक्रवार को उनके पूर्णिया के गुलाबबाग जीरोमाइल चौक स्थित पंचमुखी मंदिर कांवरिया शिविर पहुंचने पर स्थानीय लोगों और मंदिर कमेटी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. चारों धाम और प्रमुख तीर्थों का दर्शन करने के बाद अब वे अपनी साइकिल से मां कामाख्या धाम (असम) की यात्रा के लिए रवाना हो रहे हैं.
23 जनवरी को शुरू हुई थी यात्रा, तय किए कई दुर्गम पड़ाव
साइकिल यात्री रिवांश अमरनाथ मिश्रा ने बताया कि वे पिछले एक वर्ष से लगातार भ्रमण पर हैं और उनकी मौजूदा चार धाम साइकिल यात्रा 23 जनवरी को महाराष्ट्र से शुरू हुई थी:
- प्रमुख तीर्थ स्थलों के किए दर्शन: पूर्णिया पहुंचने से पहले उन्होंने यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ, बुद्ध केदार, पंचकेदार, धारी देवी, नीम करौली बाबा आश्रम (कैंची धाम), वृंदावन, श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या, गोरखपुर और बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) के दर्शन पूरे किए.
- अगला गंतव्य कामाख्या धाम: पूर्णिया में रात्रि विश्राम के बाद वे शनिवार सुबह असम स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां कामाख्या स्थान के लिए अपनी साइकिल यात्रा पर आगे बढ़ेंगे.
'हर पड़ाव एक नई कहानी और नया अनुभव': रिवांश
सैकड़ों किलोमीटर का कठिन सफर तय करने के बाद भी रिवांश के चेहरे पर थकान की जगह गजब का उत्साह नजर आया. अपनी इस अद्भुत यात्रा का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा:
"रास्ते में आने वाला हर पड़ाव अपने आप में एक नई कहानी लिखता है और हर मंजिल एक नया जीवन अनुभव देती है. पूर्णिया की धरती और यहां के लोगों का व्यवहार बहुत ही आत्मीय और सुंदर है, जिससे आगे की यात्रा के लिए नई ऊर्जा मिली है."
पंचमुखी मंदिर कमेटी ने शॉल ओढ़ाकर किया सम्मानित
गुलाबबाग के पंचमुखी मंदिर कांवरिया शिविर में रिवांश के पहुंचने पर कमेटी के पदाधिकारियों ने उनका नागरिक अभिनंदन किया और शॉल ओढ़ाकर उनकी इस साहसिक यात्रा की सराहना की.
- उपस्थित गणमान्य: इस अवसर पर मंदिर कमेटी के सदस्य रंजीत सिंह, बालेश्वर यादव, प्रमोद बेगानी, देवेन्द्र चोपड़ा, जनार्दन त्रिवेदी, राजीव बिहानी और राजेश लाहोटी सहित कई स्थानीय लोग मौजूद रहे.
