पूर्णिया जिले के बैसा प्रखंड अंतर्गत चिल्हनी गांव के पास महानंदा नदी का भीषण कटाव रुकने का नाम नहीं ले रहा है. नदी का जलस्तर और तेज कटाव गांव की घनी आबादी की ओर तेजी से रुख कर रहा है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल व्याप्त है. हर साल बाढ़ और कटाव का दंश झेलने वाले सैकड़ों परिवारों के सामने एक बार फिर से बेघर होने और आशियाना खोने का गंभीर संकट मंडराने लगा है.
"जल्द कटावरोधी काम नहीं हुआ तो मिट जाएगा गांव का अस्तित्व"
स्थानीय पूर्व मुखिया शमशाद आलम ने कटाव की भयावह स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा:
- अस्तित्व पर संकट: चिल्हनी गांव के समीप जिस गति से महानंदा नदी कटाव कर रही है, यदि समय रहते प्रशासन द्वारा पुख्ता कटावरोधी (Erosion Control) कार्य शुरू नहीं कराया गया, तो पूरे गांव का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा.
- नदी मुहाने पर बसे घर: लगभग एक दर्जन परिवारों के मकान अब नदी के बिल्कुल मुहाने (किनारे) पर आ चुके हैं. कटाव की रफ्तार इतनी तेज है कि कभी भी ये घर महानंदा नदी की धारा में विलीन हो सकते हैं.
रतजगा करने को मजबूर हैं ग्रामीण
कटाव की दहशत के कारण प्रभावित टोले के लोग दिन-रात डर के साये में जीने को मजबूर हैं:
- आशियाना उजड़ने का भय: ग्रामीणों ने बताया कि नदी का दायरा लगातार बढ़ रहा है. रात भर लोग जागकर समय बिताते हैं कि कहीं अचानक उनका मकान नदी में न समा जाए.
- प्रशासन से सुरक्षा की गुहार: ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग से मांग की है कि संवेदनशील स्थलों का तुरंत प्रशासनिक निरीक्षण किया जाए और बिना किसी देरी के कटावरोधी कार्य शुरू कराया जाए, ताकि बेघर होने की नौबत न आए.
ग्रामीणों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि समय रहते कटावरोधी उपाय नहीं किए गए, तो इस वर्ष भी कई गरीब व असहाय परिवार बेघर होकर सड़कों पर आने के लिए मजबूर हो जाएंगे.
