सीमांचल में रेल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रगति हुई है. पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के निरंतर पत्राचार और संसद में उठाए गए मुद्दों के सकारात्मक परिणाम के रूप में किशनगंज–जलालगढ़ 51.632 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन परियोजना को आगे बढ़ाने और टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की आधिकारिक अनुमति मिल गई है. भारत के राजपत्र (Gazette of India) में प्रकाशित अधिसूचना (मूल तिथि 28 जुलाई 2026, प्रकाशन तिथि 30 जुलाई 2026) के साथ ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जमीनी क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिससे बिहार और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा.
17 वर्षों का इंतजार: संसद से रेल मंत्रालय तक निरंतर पैरवी
किशनगंज-जलालगढ़ रेल लाइन परियोजना की पृष्ठभूमि और हालिया प्रगति:
- 2008-09 से लंबित थी योजना: इस रेल लाइन का प्रस्ताव वर्ष 2008-09 के रेल बजट में शामिल किया गया था, लेकिन लगभग 17 वर्षों तक बजटीय और प्रशासनिक अड़चनों के कारण यह ठंडे बस्ते में पड़ी रही.
- लोकसभा में पुरजोर आवाज: सांसद पप्पू यादव ने संसद सत्र के दौरान लोकसभा में इस मांग को प्रमुखता से उठाया और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव तथा रेलवे बोर्ड के उच्चाधिकारियों को लगातार पत्र लिखकर भूमि अधिग्रहण, सर्वे और टेंडर प्रक्रिया तेज करने का आग्रह किया.
- गजट नोटिफिकेशन से मिली गति: भारत के राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद अब चिन्हित भूखंडों का सीमांकन, पैमाइश, प्रभावित भू-स्वामियों की आपत्तियां सुनने और नियमानुसार मुआवजा वितरण की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाएगी.
परियोजना का संक्षिप्त विवरण
| प्रमुख विवरण (Key Details) | तथ्यात्मक स्थिति (Current Status) |
| परियोजना का नाम | किशनगंज–जलालगढ़ नई बीजी रेल लाइन |
| कुल लंबाई | 51.632 किलोमीटर |
| प्रस्तावित वर्ष | रेल बजट 2008-09 |
| राजपत्र अधिसूचना तिथि | मूल तिथि: 28 जुलाई 2026 (प्रकाशन: 30 जुलाई 2026) |
| वर्तमान चरण | टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति एवं भू-अधिग्रहण |
| लाभान्वित क्षेत्र | पूर्णिया, किशनगंज, सीमांचल और प. बंगाल सीमावर्ती क्षेत्र |
किसानों, व्यापारियों और आम जनता को क्या होंगे फायदे?
सांसद पप्पू यादव ने रेल मंत्री और पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) का आभार व्यक्त करते हुए परियोजना के दूरगामी आर्थिक लाभ गिनाए:
- कृषि उत्पादों का सुगम परिवहन: मक्का, जूट, अनानास और चाय पत्ती जैसे स्थानीय कृषि उत्पादों को बड़े राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में मालभाड़ा कम होगा और समय की भारी बचत होगी.
- व्यापार और रोजगार के अवसर: पूर्णिया और किशनगंज के बीच वैकल्पिक और सीधा संपर्क बनने से स्थानीय बाजारों, पर्यटन और छोटे उद्योगों को नई गति मिलेगी.
- आवागमन में सुविधा: दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों और छात्रों को सीमांचल के आंतरिक इलाकों से जिला मुख्यालयों तक आने-जाने में सुगम विकल्प मिलेगा.
