विक्रमशिला के बाद पूर्णिया में खुश्कीबाग फ्लाइओवर बजा रहा खतरे की घंटी

विक्रमशिला सेतु हादसा के बाद फ्लाईओवर को ले आशंकित हैं लोग

विक्रमशिला सेतु हादसा के बाद फ्लाईओवर को ले आशंकित हैं लोग

भारी वाहनों की आवाजाही पर है रोक फिर भी बेरोकटोक चल रहे वाहन

दो दशकों में जर्जर हो गया तीस सालों की उम्मीदों के बाद बना फ्लाइओवर

पूर्णिया. ‘सावधान, आगे रेलवे ओवरब्रीज क्षतिग्रस्त है. भारी वाहनों का आवागमन वर्जित है.’लाइन बाजार से चलकर जैसे ही आप कटिहार मोड़ पार करेंगे, मनुषमाराधार पुल पर पथ निर्माण विभाग का यह बोर्ड सहज ही दिख जाएगा. पथ निर्माण विभाग विभाग की ओर से यह बोर्ड मई 2025 के आखिरी सप्ताह में लगाया गया था जो अब तलक लगा है. इससे आगे ही रेलवे का फ्लाइओवर ब्रीज है जिसे पार कर आप गुलाबबाग जीरोमाइल की ओर जा सकते हैं. जी हां, भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के बाद पूर्णियावासी इस फ्लाईओवर को लेकर आशंकित हैं. खुश्कीबाग में बना रेलवे का यह फ्लाइओवर भी खतरे की घंटी बजा रहा है. लोग इस बात को लेकर आशंकित हैं कि कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए!

वैसे, इसे विडम्बना कहा जा रहा है कि महज दो दशकों में तीस सालों की उम्मीदों के बाद बना यह फ्लाइओवर दम तोड़ने लगा है. वैसे, जानकारों की मानें तो निर्माण के दो साल बाद ही उस समय झटका लगा था जब फ्लाईओवर में एयरक्रेक आ गया था. अखबारों में खबर आने के बाद आनन-फानन में इसकी मरम्मत करायी गई थी. इधर, पिछले साल 24 मई की शाम अचानक पुल के पास लोहे का गार्डर लगाए जाने और फ्लाइओवर के क्षतिग्रस्त होने का बोर्ड लगाए जाने पर लोग विस्मित रह गये. हालांकि भारी वाहनों के लिए लगाया जाने वाला लोहे का गार्डर अब नहीं है और सभी तरह के वाहन भी चल रहे हैं पर विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद लोग सवाल उठाने लगे हैं.

जर्जर फ्लाइओवर पर है सिक्सलेन रोड का लोड

गौरतलब है कि खुश्कीबाग के इस फ्लाइओवर पर सिक्सलेन रोड का लोड है. इस पर छोटे-बड़े वाहनों का चौतरफा दबाव बना रहता है. यही वजह है कि यह फ्लाईओवर का मुख्य ब्रीज काफी दिनों से डेंजर बना है. जानकारों की मानें तो ब्रीज के बीच का हिस्सा धंसा हुआ है जहां अधिक बारिश हो जाने पर पानी जमा हो जाता है. स्थानीय लोगों की यह शिकायत भी कई सालों से रही है कि भारी वाहनों के परिचालन से पुल हिलने लगता है. वैसे, पिछले वर्ष मई माह से भारी वाहनों के परिचालन पर पाबंदी लगा दी गई है. कुछ दिनों तक दोनों तरफ लोहे के गार्डर के साथ कड़ा पहरा लगा रहा पर अभी कुछ दिख नहीं रहा. लोहे का गार्डर कई बार लगाया गया पर अब वह भी नहीं है. शाम तक तो भारी वाहन नहीं दिखते पर स्थानीय लोग कहते हैं कि रात में सभी गाड़ियां पार करती हैं.

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आंकड़ों पर एक नजर

1977 में जनता पार्टी के शासनकाल में मिली थी स्वीकृति

25 सालों का सफर तय करना पड़ा बजट में आने के लिए2005-06 के वित्तीय वर्ष में किया गया था उद्घाटन

27 करोड की लागत से हुआ था रेलओवर ब्रीज का निर्माण60 मीटर है ओवरब्रिज की लंबाई

22.5 मीटर के करीब है ओवरब्रिज की चौड़ाई

184 मीटर है गुलाबबाग की ओर से रिटर्निंग वाल

190 मीटर है कटिहार मोड़ साइड से रिटर्निंग वाल

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लेखक के बारे में

Published by: Akhilesh chandra

अखिलेश चंद्रा प्रिंट माध्यम में 30 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं.

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