पूर्णिया से विकास वर्मा की रिपोर्ट
Jackal Attack: बिहार के पूर्णिया जिले के ग्रामीण अंचलों में हिंसक वन्य जीवों के हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. जिला मुख्यालय से सटे कसबा थाना क्षेत्र की बेतोना पंचायत में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब खेतों में कृषि कार्य कर रहे मजदूरों और किसानों पर एक जंगली गीदड़ (सियार) ने धावा बोल दिया. इस अप्रत्याशित हमले में एक आठ वर्षीय बच्ची और महिलाओं समेत कुल छह लोग बुरी तरह कटकर लहूलुहान हो गए. अचानक हुए इस हमले से बेतोना गांव में चीख-पुकार मच गई. खुद को ग्रामीणों से घिरता देख गीदड़ और अधिक हिंसक हो गया, जिसके बाद आत्मरक्षार्थ एकजुट हुए ग्रामीणों ने लाठी-डंडों से पीट-पीटकर उस हिंसक पशु को मौके पर ही मार गिराया.
घात लगाकर किया हमला; जरू उरांव के होंठ को नोचा
- खेतों में चल रहा था काम: घायल रामरती उरांव ने अस्पताल में बताया कि बेतोना के ग्रामीण रोज की तरह सुबह अपने खेतों में पटवन और निकौनी का काम कर रहे थे. इसी दौरान झाड़ियों में घात लगाकर बैठे गीदड़ ने अचानक हमला किया.
- गंभीर चोटें: हिंसक गीदड़ ने ग्रामीणों को दौड़ा-दौड़ा कर काटा. इस दौरान जरू उरांव नामक ग्रामीण के होंठ को गीदड़ ने बुरी तरह नोच लिया, जिससे उनकी हालत काफी नाजुक बनी हुई है.
- घायलों की सूची: इस हमले में जख्मी हुए लोगों में बेतोना निवासी पुनिता देवी, रामरेती उरांव, जरू उरांव, 8 वर्षीय बच्ची मीनाक्षी, बीरेंद्र उरांव तथा एक अन्य ग्रामीण शामिल हैं.
जीएमसीएच पूर्णिया में इलाज जारी; किसानों में दहशत का माहौल
बेहतर इलाज के लिए किया गया रेफर: घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों की मदद से सभी घायलों को पास के स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. प्राथमिक उपचार के बाद घाव की गंभीरता और रेबीज के संक्रमण के खतरे को देखते हुए चिकित्सकों ने सभी को राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (GMCH), पूर्णिया रेफर कर दिया, जहां फिलहाल इमरजेंसी वार्ड में उनका इलाज चल रहा है.
| प्रभावित क्षेत्र व थाना | घायलों की कुल संख्या | हमले का शिकार मुख्य पशु | वर्तमान चिकित्सीय स्थिति | ग्रामीणों का तात्कालिक एक्शन |
| बेतोना गांव (कसबा थाना, पूर्णिया) | 06 लोग (01 बच्ची व महिलाओं सहित) | जंगली गीदड़ (जैकल) | जीएमसीएच (GMCH) पूर्णिया में इलाज जारी, स्थिति स्थिर. | लाठी-डंडों से जवाबी हमला कर हिंसक पशु को मार गिराया. |
वन विभाग से सुरक्षा और मुआवजे की मांग
इस घटना के बाद से बेतोना और आस-पास के ग्रामीण इलाकों में भय का सन्नाटा पसरा हुआ है. धान के इस चालू सीजन में किसान और खेतिहर मजदूर अब खेतों की ओर जाने से कतरा रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पहले तेंदुए की आहट से लोग डरे हुए थे और अब इस घटना ने उनके डर को और बढ़ा दिया है.
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वन विभाग (Forest Department) के अधिकारियों से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, जंगली जानवरों के रिहायशी इलाकों में प्रवेश को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम करने तथा इस हमले में घायल हुए गरीब मजदूरों के लिए उचित सरकारी आर्थिक मुआवजे की मांग की है ताकि अस्पताल में उनका इलाज सुचारू रूप से हो सके.
