पूर्णिया के गुलाबबाग स्थित तेरापंथ भवन में जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्म संघ के एकादशमाधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन आध्यात्मिक निर्देशन में आठ दिवसीय महान पर्व पर्वाधिराज पर्युषण की साधना पूरे भक्तिभाव और अनुशासन के साथ जारी है. उपासक प्राध्यापक निर्मल जी नौलखा एवं उनके सहयोगी उपासक नवरतन जी बेंगानी के सान्निध्य में छह दिनों की तप-साधना के बाद सातवें दिन सोमवार को श्रद्धालुओं ने 'ध्यान दिवस' के रूप में मनाया.
इससे पूर्व पर्युषण के अंतर्गत क्रमश: खाद्य संयम दिवस, स्वाध्याय दिवस, सामायिक दिवस, वाणी संयम दिवस, व्रत चेतना दिवस और जप दिवस का विधि-विधान से पालन किया गया.
भगवान ऋषभदेव के 13 पूर्व भवों का आध्यात्मिक विवेचन
ध्यान दिवस के अवसर पर मुख्य उपासक प्राध्यापक निर्मल जी नौलखा ने जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के आध्यात्मिक सफर और उनके पूर्व जन्मों पर विस्तृत प्रकाश डाला:
- सम्यकत्व की प्राप्ति: उन्होंने प्रवचन में बताया कि भगवान ऋषभ के जीव ने सर्वप्रथम 'धन्ना सार्थवाह' के भव में सम्यक दृष्टि (सम्यकत्व) को अंगीकार किया था.
- चक्रवर्ती से तीर्थंकर बनने का पथ: ग्यारहवें भव में वे चक्रवर्ती सम्राट बने और बाद में सांसारिक वैभव का त्याग कर जिनदीक्षा ग्रहण की, जहां उन्होंने तीर्थंकर नाम कर्म का उपार्जन (बंध) किया.
- देवलोक से अवतरण: इसके बाद देव और मनुष्य गति के विभिन्न भवों से गुजरते हुए वे 12वें भव में 26वें देवलोक (सर्वार्थसिद्ध विमान) में उत्पन्न हुए. वहां अपना आयुष्य पूर्ण करने के उपरांत उन्होंने माता मरुदेवी की कोख से भगवान ऋषभदेव के रूप में अवतरण लिया.
उपासक नवरतन बेंगानी ने दी ध्यान की गहरी समझ
सहयोगी उपासक नवरतन जी बेंगानी ने ध्यान दिवस के आध्यात्मिक महत्व और अंतर्मुखी होने की प्रक्रिया को रेखांकित किया:
| ध्यान का प्रकार | स्वरूप | प्रभाव व फल |
| अशुभ ध्यान (आर्त व रौद्र ध्यान) | दुख, शोक, क्रोध, हिंसा व बदले की भावना से युक्त मानसिक दशा | कर्म बंध का कारण और आत्म-पतन की ओर अग्रसर करता है |
| शुभ ध्यान (धर्म व शुक्ल ध्यान) | समता, अहिंसा, करुणा, आत्म-निरीक्षण और राग-द्वेष से मुक्ति | कर्मों की निर्जरा, आत्म-शांति और मोक्ष मार्ग का प्रशस्तीकरण |
उपासक बेंगानी ने श्रावक समाज से दैनिक जीवन में अशुभ विचारों का त्याग कर धर्म और समता रूपी शुभ ध्यान को आत्मसात करने का आह्वान किया.
तेरापंथ भवन में जुटी श्रावक-श्राविकाओं की भीड़
गुलाबबाग तेरापंथ भवन में आयोजित इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रावक और श्राविकाओं ने भाग लेकर सामूहिक सामायिक व ध्यान का अभ्यास किया. इस दौरान संपूर्ण भवन परिसर "अहिंसा, संयम और तप" के जयघोष से गुंजायमान रहा. पर्युषण के आगामी और अंतिम चरण में मनाए जाने वाले क्षमापना दिवस (संवत्सरी) को लेकर भी समाज में गहरी उत्सुकता देखी जा रही है.
