PURNIA :मानवता, प्रकृति व स्त्री चित्रण की त्रिवेणी है कवि गुरु की कृति : डॉ शिवमुनि यादव
रवींद्रनाथ टैगोर स्मृति में कलाभवन साहित्य विभाग की ओर से आयोजित की गई.गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के चित्र पर पुष्पांजलि के पश्चात इस सारस्वत समारोह की शुरुआत हुई.
रवींद्रनाथ टैगोर स्मृति में कलाभवन साहित्य विभाग की ओर से आयोजित की गई.गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के चित्र पर पुष्पांजलि के पश्चात इस सारस्वत समारोह की शुरुआत हुई. कलाभवन साहित्य विभाग की संयोजिका डॉ. निरुपमा राय ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की नोबेल पुरस्कार से पुरस्कृत अद्भुत कृति गीतांजलि की प्रथम कविता के पाठ के साथ आगत अतिथियों का स्वागत किया और कहा आज की संगोष्ठी कई दृष्टिकोणों विशिष्ट है. अध्यक्षता कर रहे डॉ. शिवमुनि यादव ने गुरुदेव को महामानव बताते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि गुरुदेव की कृतियों के पठन मात्र से मानवता प्रकृति और स्त्री चित्रण की त्रिवेणी का भली भांति ज्ञान हो जाता है. मुख्य अतिथि और गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर पर शोध करने वाले डॉ देवेंद्र कुमार देवेश ने विस्तार से गुरुदेव के बारे में चर्चा की और उनकी रचनाओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि आज भी रविंद्र संगीत भारत ही नहीं विदेशों में भी लोकप्रिय है. गुरुदेव केवल साहित्यकार ही नहीं थे, अपितु चित्रकला नृत्य कला गायन कला संगीत कला सभी में प्रवीण थे. विशिष्ट अतिथि डॉ कामेश्वर पंकज ने अपने सारगर्भित वक्तव्य में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की कहानियों और उपन्यास पर चर्चा की.प्रोफेसर शंभू लाल वर्मा कुशाग्र, डॉ .उषा शरण, डॉ प्रभात नारायण झा, डॉक्टर के के चौधरी, प्रो विजयारानी समेत कई वक्ताओं ने विषय वस्तु पर प्रकाश डाला. इस अवसर पर गुरुदेव की कविताओं से माहौल संगीतमय हो गया.
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