सावन के पवित्र महीने में पूर्णिया का गुलाबबाग स्थित जीरोमाइल चौक पूर्वोत्तर भारत और पड़ोसी देश नेपाल से आने वाले कांवरियों का प्रमुख पड़ाव केंद्र बन गया है. यहां के ऐतिहासिक पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर में लगे विशाल कांवरिया शिविर में सुबह से शाम तक 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयकारे गूंज रहे हैं. स्थानीय व्यापारी और समाजसेवक अपना कारोबार छोड़कर पूरे समर्पण भाव से इन देशी-विदेशी कांवरियों की सेवा में दिन-रात जुटे हुए हैं.
नेपाल और पूर्वोत्तर भारत के कांवरियों का पसंदीदा केंद्र
सावन की शुरुआत के साथ ही असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल और नेपाल से आने वाले कांवरियों के जत्थे लगातार यहां पड़ाव डाल रहे हैं:
- देवघर यात्रा और वापसी का पड़ाव: कांवरिये देवघर (बाबा धाम) जाते समय और बाबा भोलेनाथ को जल चढ़ाकर लौटते समय भगवान पंचमुखी हनुमान का दर्शन करने और विश्राम के लिए यहां रुकते हैं.
- आध्यात्मिक माहौल: पूरे सावन भर जीरोमाइल चौक परिसर में लगातार होने वाले भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चार से संपूर्ण क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय बना रहता है.
दशकों पुरानी परंपरा: निशुल्क भोजन, दवा और चिकित्सा
गुलाबबाग के इस शिविर का आयोजन पिछले कई दशकों से स्थानीय समाज और मंदिर समिति द्वारा किया जा रहा है. यह शहरी क्षेत्र का एकमात्र ऐसा वृहद कांवरिया शिविर है जहां तमाम सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं:
- स्वास्थ्य सुविधाएं: शिविर में चिकित्सकों और कंपाउंडरों की टीम तैनात रहती है जो कांवरियों के पैरों के छालों का इलाज, मरहम-पट्टी और मुफ्त दवाइयां उपलब्ध कराती है.
- भोजन और विश्राम: शुद्ध पेयजल, फलाहार और ताजा भोजन की व्यवस्था चौबीसों घंटे रहती है.
सेवा भावना से जुटे स्थानीय व्यापारी
शिविर की संपूर्ण व्यवस्था आपसी जनसहयोग से संचालित होती है. क्षेत्र के छोटे-बड़े कारोबारी और समाजसेवी खुद स्वयंसेवक (Volunteers) के रूप में कांवरियों के चरणों की सेवा करते हैं.
प्रमुख सेवादार: बालेश्वर यादव, देवेन्द्र चोपड़ा, दिलीप यादव, प्रेम कुमार राय, राजेश लाहोटी, जनार्दन त्रिवेदी, राजू लोहिया, रंजीत सिंह, मिठाई पांडे, सतीश कुमार साह, विक्रम सिंह, रवि बिहानी, नारायण लोहिया और रमेश पारिक समेत कई नागरिक दिन-रात कांवरियों की सेवा में मुस्तैद हैं.
