मौसम के तेजी से बदलते मिजाज और मौसमी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (GMCH) पूर्णिया की शुक्रवार की ओपीडी (OPD) सेवाओं के लिए डॉक्टरों की विशेष तैनाती की गई है. अस्पताल प्रशासन ने खासकर नवजात शिशुओं, बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा कान, नाक एवं गला (ENT) से संबंधित रोगियों के इलाज पर विशेष फोकस रखा है. शुक्रवार की ओपीडी में बाल रोग विभाग में एक साथ पांच शिशु रोग विशेषज्ञ मौजूद रहेंगे, जबकि ईएनटी में तीन और गायनी विभाग में दो महिला चिकित्सक सेवाएं देंगी. इसके अलावा मेडिसिन, सर्जरी, हड्डी, त्वचा, आंख, दांत और मानसिक रोग विभाग में भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित की गई है.
रजिस्ट्रेशन और ओपीडी का समय (Timings)
मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल प्रबंधन ने दो पालियों में ओपीडी व रजिस्ट्रेशन का समय निर्धारित किया है:
- रजिस्ट्रेशन (पर्चा काउंटर) समय:
- सुबह की पाली: प्रातः 08:30 बजे से दोपहर 01:30 बजे तक
- शाम की पाली: दोपहर 03:30 बजे से शाम 05:30 बजे तक
- ओपीडी परामर्श समय:
- सुबह की पाली: प्रातः 09:00 बजे से दोपहर 02:00 बजे तक
- शाम की पाली: शाम 04:00 बजे से 06:00 बजे तक
जीएमसीएच पूर्णिया: शुक्रवार का विभागवार ड्यूटी रोस्टर
अस्पताल प्रशासन द्वारा शुक्रवार के लिए जारी विशेषज्ञ चिकित्सकों की सूची:
| विभाग (Department) | तैनात चिकित्सक (Doctor on Duty) |
| पीडियाट्रिक्स (शिशु रोग विभाग) | डॉ. प्रेम प्रकाश, डॉ. राजू, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. सौरभ, डॉ. रज्ज़ाक |
| ईएनटी (कान, नाक व गला रोग) | डॉ. संजीव, डॉ. गोपाल झा, डॉ. एचके. शर्मा |
| गायनी (स्त्री एवं प्रसूति रोग) | डॉ. ऋचा झा, डॉ. ज्योति झा |
| मेडिसिन (जनरल फिजिशियन) | डॉ. पंकज कुमार |
| सर्जरी | डॉ. अपराजिता अनुपम |
| ऑर्थोपेडिक (हड्डी रोग) | डॉ. सीके. दास |
| स्किन (त्वचा रोग) | डॉ. जॉली |
| आई (नेत्र रोग) | डॉ. शीलमणी |
| डेंटल (दंत रोग) | डॉ. नाहिद |
| मानसिक रोग (मनोचिकित्सा) | डॉ. नायाब अंजुम |
बच्चों और मौसमी बीमारियों पर विशेष फोकस
- शिशु गहन जांच व टीकाकरण: बदलते मौसम में वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और निमोनिया से पीड़ित बच्चों के लिए पांच बाल रोग विशेषज्ञ उपलब्ध रहेंगे, जिससे परिजनों को कतारों में अधिक समय नहीं बिताना पड़ेगा. साथ ही बच्चों के नियमित टीकाकरण की भी व्यवस्था रहेगी.
- काउंसिलिंग और जांच: मानसिक रोग विभाग में तनाव व अवसाद से ग्रसित मरीजों की विशेष काउंसलिंग की जाएगी, वहीं मेडिसिन और सर्जरी ओपीडी में गंभीर लक्षणों वाले मरीजों को आवश्यकतानुसार इनडोर वार्ड (IPD) में भर्ती कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.
