पूर्णिया से सत्येंद्र सिन्हा गोपी की रिपोर्ट.
GMCH Purnea: जन्म के तुरंत बाद जब कोई नवजात जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा होता है, तब पूर्णिया राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल का एनआईसीयू और एमएनसीयू उसके लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आता है. यहां प्रीमैच्योर, कम वजन वाले और जन्मजात बीमारियों से जूझ रहे नवजातों को अत्याधुनिक सुविधाओं के बीच नया जीवन मिल रहा है. खास बात यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सुविधा किसी वरदान से कम नहीं है.
31 वार्मर और 20 बेड, मां के साथ रह सकते हैं नवजात
जीएमसीएच के तृतीय तल पर स्थित नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (NICU) और मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट (MNCU) में नवजातों की देखभाल के लिए विशेष व्यवस्था की गई है. यहां 31 वार्मर उपलब्ध हैं, जबकि 20 बेड ऐसे हैं जहां नवजात अपनी मां के साथ रह सकते हैं.
अस्पताल में इंटेंसिव कंगारू मदर केयर की भी सुविधा है, जहां माताएं अपने बच्चों को स्तनपान कराती हैं और लगातार उनके संपर्क में रहती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नवजातों के तेजी से स्वस्थ होने में मदद मिलती है.
24 घंटे चलती है सेवा, सातों दिन तैनात रहती है टीम
जीएमसीएच का एनआईसीयू और एमएनसीयू सप्ताह के सातों दिन और चौबीसों घंटे संचालित रहता है. प्रत्येक शिफ्ट में दो चिकित्सक, दो स्टाफ नर्स और दो ममता कर्मियों की तैनाती की जाती है. ये सभी नवजातों की निगरानी, उपचार और आवश्यक देखभाल सुनिश्चित करते हैं.
इलाजरत बच्चों के परिजनों के लिए अस्पताल परिसर में ठहरने की व्यवस्था भी की गई है. बच्चे की मां को अस्पताल की ओर से समय-समय पर निःशुल्क भोजन भी उपलब्ध कराया जाता है.
कोसी-सीमांचल के हजारों परिवारों की उम्मीद बना जीएमसीएच
पूर्णिया के अलावा कोसी और सीमांचल के विभिन्न जिलों से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां पहुंचते हैं. प्रखंड स्तर से भी गंभीर रूप से बीमार या कम वजन वाले नवजातों को रेफर कर यहां भेजा जाता है.
अस्पताल में पीलिया, सांस संबंधी समस्या और प्रीमैच्योर बच्चों के इलाज के लिए सी-पैप जैसी सुविधा भी उपलब्ध है. मरीजों की बढ़ती संख्या के बावजूद चिकित्सक लगातार निगरानी और देखभाल में जुटे रहते हैं.
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GMCH Purnea: जल्द शुरू होगी नियोनेटल स्क्रीनिंग की सुविधा
चिकित्सकों के अनुसार एमएनसीयू यूनिट बिहार के मेडिकल कॉलेजों में अपनी तरह की पहली सुविधा है. जल्द ही यहां नियोनेटल स्क्रीनिंग की सुविधा भी शुरू होने वाली है. इससे थायरॉयड समेत कई जन्मजात बीमारियों की शुरुआती जांच और समय पर इलाज संभव हो सकेगा.
पूर्णिया जीएमसीएच की यह पहल उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद बन रही है, जिनके घरों में अब नवजातों की किलकारियां सुरक्षित सुनाई दे रही हैं.
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