जलालगढ़. पूर्णिया जिले में उर्वरकों के संतुलित उपयोग जागरूकता अभियान पूर्णिया जिले के कृषि विज्ञान केंद्र में बुधवार को जागरूकता अभियान कार्यक्रम का आयोजन किया गया. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिषद पटना तथा कृषि विज्ञान केंद्र पूर्णिया के संयुक्त तत्वाधान में आयोजन का सफलतापूर्वक किया गया. इसमें 30 से अधिक हितधारक किसानों ने भाग लिया कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञ एवं वैज्ञानिकों के सक्रिय भागीदारी रही. इनमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद पूर्वी अनुसंधान परिषद पटना के डॉ संतोष कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं डॉ गौश अली, कृषि विज्ञान केंद्र पूर्णिया के वैज्ञानिक डॉ गोविंद कुमार, मृदा वैज्ञानिक डॉ संतोष कुमार, कृषि अभियंत्रण के डॉ अतिश सागर एवं कीट वैज्ञानिक अनामिका कुमारी व तकनीकी कर्मचारी शामिल थे. इन विशेषज्ञों ने किसानों के साथ सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को सुना और वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत किया. विशेष गुण संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व पर जोर देते हुए रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से बचने की सलाह दी तथा टिकाऊ खेती के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन आईएनएम को अपनाने पर बल दिया. किसानों को सलाह दी कि वह रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ जैविक खाद जैसे गोबर खाद कंपोस्ट एवं हरी खाद का भी प्रयोग करें.इसमें न केवल मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि मिट्टी में जल धारण क्षमता एवं सूक्ष्मजीवों गतिविधियों भी बढ़ेगी. हरित खाद के महत्व को रेखांकित करते हुए किसानों को ढैचा और सनई जैसे फसलों की खेती करने के लिए प्रेरित किया गया. इसमें मृदा की उर्वरता में सुधार हो सके. हरी खाद के महत्व का किसान के खेत में प्रदर्शन हेतु ढैंचा बीज किसानों के बीच निश्शुल्क वितरित किया गया.इसके अतिरिक्त गोबर खाद एफवाईएम के उचित प्रबंधन एवं उपयोग के संबंध में भी किसानों को जानकारी दी गई जिससे पोषक तत्वों की हानि को कम किया जा सके और मृदा स्वास्थ्य में सुधार हो.
कृषि विज्ञान केंद्र में उर्वरकों के संतुलित उपयोग को लेकर किसानों को किया गया जागरूक
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