शिक्षा विभाग में अधिकारियों की कमी, स्थायी डीईओ भी पदस्थापित नहीं
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों की कमी से प्रभावित हो रहे एक साथ कई कार्य
पूर्णिया. जिले के शिक्षा विभाग में अधिकारियों का अभाव हो गया है. खास तौर पर प्रखंडों में स्थिति बहुत खराब हो रही है. प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों की कमी से कई कार्य प्रभावित हो रहे है जबकि अभी जिले के शिक्षा विभाग को स्थायी डीईओ का भी इंतजार है. जिला स्थापना विभाग के डीपीओ जिला शिक्षा पदाधिकारी के प्रभार में हैं. नतीजतन मुख्यालय का विभागीय कार्य भी प्रभावित हो रहा है.
गौरतलब है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी शिवनाथ रजक 31 जनवरी रिटायर हो गये. उनके जाने पर स्थापना डीपीओ को डीईओ का अतिरिक्त प्रभार मिला है. विभाग में डीपीओ की भी घोर कमी है. शिक्षा विभाग के पीओ को डीपीओ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. इससे भी शिक्षा विभाग के कई ऐसे कार्य हैं जो प्रभावित हो रहे हैं. ऐसे में पदाधिकारियों की कमी से कहीं न कहीं कार्य प्रभावित हो रहे हैं. बीईओ की कमी से योजनाओं व कार्यों की मॉनिटरिंग, फाइलों के निष्पादन, प्रतिवेदन सौंपने जैसे कार्य प्रभावित हो रहे है. जिले की पूरी शिक्षा व्यवस्था प्रभार में होने की वजह से समय पर कोई काम पूरा नहीं हो रहे है. ऐसा नहीं है कि शिक्षा विभाग में समय पर कार्यों का निष्पादन नहीं हो रहा है. यहां कई ऐसे कार्य हैं जो समय पर हो जा रहा है. लेकिन संबंधित पदाधिकारी के नहीं रहने से और प्रभार में रहने से कहीं न कहीं कार्यों के निष्पादन में समय लग रहा है. प्रखंडों में बीईओ नहीं रहने के कारण शिक्षक अपनी समस्याओं को अपनी बात शेयर खुल कर नहीं कर पाते है.प्रखंड 14 और अधिकारी मात्र छह
यह विडम्बना है कि जिले में कुल 14 प्रखंड हैं पर महज छह प्रखंडों में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी पदस्थापित हैं जबकि जबकि जिले में सदर क्षेत्र सहित 15 बीइओ की जरुरत है. इसमें ऐसे भी बीईओ हैं जिन पर एक से अधिक प्रखंडों का प्रभार है. जबकि शिक्षा विभाग के कई डीपीओ भी बीईओ के प्रभार में हैं. ऐसे में इन सभी पदाधिकारियों पर दोहरा दबाव है. विभागीय जानकारों के अनुसार, जिले के छह प्रखंडों के डगरुआ, धमदाहा, बैसा, बायसी, भवानीपुर और बनमनखी प्रखंडों में बीइओ कार्यरत हैं. इसमें धमदाहा बीईओ रुपाली के प्रभार में भी हैं . इसी तरह भवानीपुर बीईओ बीकोठी के प्रभार में हैं .डीपीओ पर कई अतिरिक्त प्रभार
शिक्षा विभाग में अधिकारियों की किल्लत का आलम यह है कि एक डीपीओ पर कई अतिरिक्त प्रभार है. एसएसए डीपीओ के जिम्मे केनगर प्रखंड के बीईओ का अतिरिक्त प्रभार है जबकि डीपीओ एमडीएम के जिम्मे श्रीनगर और पूर्णिया पूर्व प्रखंड के बीईओ का प्रभार है. डीपीओ माध्यमिक के जिम्मे कसबा और जलालगढ़ प्रखंड के बीईओ का प्रभार है. आरडीडीइ पीओ के जिम्मे अमौर प्रखंड के बीईओ का अतिरिक्त प्रभार है. इस तरह शिक्षा विभाग के तीन डीपीओ पर अलग-अलग पांच प्रखंडों के बीईओ के अतिरिक्त प्रभार है जबकि डीपीओ की भी कमी है. आलम यह है कि एसएसए डीपीओ को योजना लेखा के डीपीओ का प्रभार भी है. जबकि एसएसए डीपीओ पीओ भी हैं. एक साथ इनके ऊपर तीन विभागों का जिमा है. वहीं पीओ शशिचन्दन चौधरी डीपीओ एमडीएम के प्रभार का अतिरिक्त प्रभार में है. इसी तरह पीओ अविनाश कुमार आनंद को डीपीओ माध्यमिक के अतिरिक्त प्रभार में हैं.पीओ पर भी काम का डबल दबाव
अधिकारियों की परेशानी यह है कि वे अतिरिक्त प्रभार के कारण किसी का काम सही ढंग से नहीं कर पाते. पीओ की स्थिति भी वही हो गई है क्योंकि जरुरत के हिसाब से इस पद पर भी पदस्थापना नहीं है. वर्तमान व्यवस्था में आरडीडीइ के पीओ के पास एक प्रखंड के बीईओ का प्रभार है. जिले में छह पीओ की जगह तीन कार्यरत हैं.————————————
कहते हैं शिक्षक संघ के अध्यक्ष
जिले में स्थायी डीईओ के नहीं रहने से शिक्षकों का वेतन प्रभावित है जबकि उच्च विद्यालय और उच्च माध्यमिक विद्यालय के कार्य प्रभावित हो रहे हैं. जिले में अतिशीघ्र स्थायी डीईओ की जरूरत है. प्रखंडों में स्थायी बीईओ के नहीं रहने से विशिष्ट शिक्षकों का वेतन नहीं मिला है. जिले में स्थायी डीईओ के साथ साथ डीपीओ एवं बीईओ की अतिशीघ्र पदस्थापना की आवश्यकता है. पवन जायसवाल, जिलाध्यक्ष, बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ पूर्णियाडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
