पूर्णिया के कोर्ट स्टेशन दुर्गा मंदिर में पूजा की तैयारी: 1970 में हुई थी स्थापना, सजेंगे दो तोरण द्वार

पूर्णिया का ऐतिहासिक कोर्ट स्टेशन दुर्गा मंदिर शारदीय नवरात्र के लिए सजने लगा है. 1970 में स्थापित इस मंदिर के भव्य जीर्णोद्धार के बाद इस साल की पूजा खास होगी. जानिए क्या हैं तैयारियां.

शारदीय नवरात्र एवं दुर्गा पूजा के पावन पर्व के नजदीक आते ही पूर्णिया के कोर्ट स्टेशन स्थित ऐतिहासिक 'सार्वजनिक दुर्गा मंदिर' प्रांगण में उत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं. मंदिर कार्यकारिणी समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक अध्यक्ष केशव कुमार गिरी की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें आगामी पूजा को अत्यंत भव्य, व्यवस्थित और दिव्य स्वरूप देने को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए.

बैठक में माता रानी की प्रतिमा निर्माण, मंदिर के रंग-रोगन, आधुनिक विद्युत सज्जा (भव्य लाइटिंग), पंडाल निर्माण और कलश स्थापना से लेकर महानवमी तक सुचारू प्रसाद वितरण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई.

कोर्ट स्टेशन रोड पर दोनों ओर सजेगी रोशनी, बनेंगे दो तोरण द्वार

मंदिर समिति ने इस वर्ष के उत्सव को ऐतिहासिक बनाने के लिए विशेष रूपरेखा तय की है:

  • विशाल तोरण द्वार: श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए मंदिर परिसर के पूरब और पश्चिम—दोनों मुख्य मार्गों पर भव्य तोरण द्वारों का निर्माण कराया जाएगा.
  • पूरा मार्ग होगा जगमग: कोर्ट स्टेशन रोड के दोनों किनारों पर स्थित प्रत्येक मकान और प्रतिष्ठान पर एकरूपता के साथ विशेष लाइटिंग की सजावट की जाएगी.
  • नौ दिनों तक महाप्रसाद: प्रथम पूजा (कलश स्थापना) से लेकर नवमी तक प्रतिदिन श्रद्धालुओं के बीच नियमित और सुव्यवस्थित प्रसाद वितरण की व्यवस्था रहेगी.

1970 से लेकर 2018 के जीर्णोद्धार तक का गौरवशाली सफर

समिति के पदाधिकारियों ने मंदिर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया:

  • स्थापना काल: कोर्ट स्टेशन स्थित इस सार्वजनिक दुर्गा मंदिर की स्थापना वर्ष 1970 में स्थानीय श्रद्धालुओं के सहयोग से की गई थी.
  • भव्य जीर्णोद्धार (2018): बदलते समय के साथ वरीय नागरिक समिति (पूर्णिया प्रमंडल) और स्थानीय नागरिकों के आपसी विचार-विमर्श के बाद वर्ष 2018 में मंदिर का नवनिर्माण व जीर्णोद्धार कराया गया.
  • पांच दिव्य विग्रहों की प्राण-प्रतिष्ठा: नवनिर्मित भव्य मंदिर में मां दुर्गा की स्थायी पाषाण प्रतिमा के अलावा शिव परिवार, राधे-कृष्ण, राम परिवार और महाबली हनुमान जी सहित पांच देव स्वरूपों की प्राण-प्रतिष्ठा पूर्ण वैदिक रीति-रिवाज और मंत्रोच्चार के साथ की गई.

दर्जनभर मोहल्लों की आस्था का केंद्र, पारंपरिक लोकगीत होंगे आकर्षण

यह मंदिर पूरे शहर के विस्तृत भू-भाग की सामाजिक और धार्मिक एकता का प्रतीक है:

  • जुड़े प्रमुख इलाके: कोर्ट स्टेशन, जनता चौक, हवाई अड्डा क्षेत्र, डीआईजी चौक, महानंदा कॉलोनी, साहेबान हाता, प्रोफेसर कॉलोनी, कोसी कॉलोनी, रंगभूमि मैदान, झील टोला, बाघमारा और सरना चौक सहित कई वार्डों के हजारों श्रद्धालु सीधे तौर पर इस मंदिर से जुड़े हैं.
  • महिलाओं के पारंपरिक लोकगीत: पूजा के दौरान महाअष्टमी और महानवमी की संध्या को स्थानीय महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले पारंपरिक देवी जागरण व मैथिली-अंगिका लोकगीत पूरे आयोजन में आकर्षण और भक्ति का मुख्य केंद्र होते हैं.

बैठक में प्रमुख रूप से रहे उपस्थित

तैयारी बैठक में समिति के अध्यक्ष केशव कुमार गिरी, राजेंद्र पंडित, जवाहर यादव, त्रिवेणी राय, लवलेश श्रीवास्तव, भोला यादव, सुरेश पूर्वे, दिनेश पूर्वे, सरोज मिश्र और अरुण यादव सहित समिति के अनेक वरिष्ठ सदस्य व स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

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लेखक के बारे में

By सत्येन्द्र सिन्हा गोपी

सत्येन्द्र सिन्हा गोपी प्रिंट माध्यम में 25 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. आकाशवाणी एवं दूरदर्शन समाचार से पत्रकारिता की शुरुआत की. नाटक, कला संस्कृति, गीत संगीत, कृषि व मेडिकल क्षेत्र में विशेष अभिरुचि रखते हैं.

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