पूर्णिया की डॉ निरुपमा राय को मेरठ में मिला नारायणी सुषमा स्वराज राष्ट्रीय महिला सम्मान

वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्णिया विश्वविद्यालय में संस्कृत की व्याख्याता डॉ निरुपमा राय को मेरठ में नारायणी सुषमा स्वराज राष्ट्रीय महिला सम्मान से नवाजा गया है.

शंकराचार्य जगद्गुरु मां त्रिकाल भवंता सरस्वती माता के हाथों प्राप्त हुआ सम्मान

पूर्णिया. वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्णिया विश्वविद्यालय में संस्कृत की व्याख्याता डॉ निरुपमा राय को मेरठ में नारायणी सुषमा स्वराज राष्ट्रीय महिला सम्मान से नवाजा गया है. डॉ राय देश की अकेली ऐसी शख्सियत हैं, जिन्हें इस साल यह सम्मान मिला है. मेरठ के चौधरीचरण सिंह विश्वविद्यालय के अटल सभागार में आयोजित सारस्वत समारोह में डॉ राय को यह सम्मान भारत की पहली महिला शंकराचार्य जगद्गुरु मां त्रिकाल भवंता सरस्वती माता जी के कर कमलों से प्राप्त हुआ. डॉ निरुपमा राय को मिले इस सम्मान से पूर्णिया के लोग गौरवान्वित हुए हैं.

गौरतलब है कि भारत सरकार द्वारा समादृत मेरठ की सर्वहित कल्याण सेवा समिति और भारत सरकार द्वारा सम्मानित और अनुमोदित पर्यावरण केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में 2010 से नारायणी सुषमा स्वराज राष्ट्रीय महिला सम्मान प्रदान किया जाता रहा है. इस बार यह सम्मान समारोह में उपस्थित बांसुरी स्वराज, अरुण गोविल और स्थानीय अन्य विशिष्ट जनों के समक्ष भारतीय संस्कृति और साहित्य के संरक्षण के लिए पूर्णिया निवासी वरिष्ठ साहित्यकार डॉ निरुपमा राय को प्रदान किया गया. समारोह के अध्यक्ष थे उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ श्याम बिहारी गुप्ता और संयोजक भारत की प्रख्यात पर्यावरणविद और विश्वविद्यालय में बॉटनी की विभागाध्यक्ष डॉ मधु वत्स थीं. इस अवसर पर सेवक भारतीय नमो संघ के अध्यक्ष डॉ मनोज कुमार मन्नू समेत साहित्य के कई विशिष्टजन इस गौरवमय पल के साक्षी बने. इससे पूर्व इस संस्था से निकलने वाली हरित पर्याय नामक त्रैमासिक पर्यावरण आधारित पत्रिका में प्रकाशित डॉक्टर निरुपमा राय के आलेख ‘अथर्ववेद में गाय का वर्णन’ को खूब सराहा गया.

याद रहे कि डॉ निरुपमा राय प्राध्यापिका होने के साथ ही वरिष्ठ साहित्यकार भी हैं. विष्णु पुराण में भक्ति तत्व पर इन्हें विशेषज्ञता प्राप्त है. डॉ राय का सात कहानी संग्रह, दो उपन्यास, दो कविता संग्रह ,एक नारी विमर्श और एक पुस्तक उपनिषद पर प्रकाशित हो चुका है. इसके साथ ही देश भर की विशिष्ट पत्र पत्रिकाओं में 200 से अधिक कहानियां शताधिक कविताएं और शताधिक आलेख हिंदी और संस्कृत में प्रकाशित हुई हैं. डॉ राय को स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार और सम्मान से नवाजा जा चुका है. साहित्य और संस्कृति समाज सेवा से जुड़ी कई संस्थाओं में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है.

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