पूर्णिया शहर के खजांचीहाट, झंडा चौक स्थित प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान डीपीएस स्कूल (DPS School) में छात्राओं के समग्र व्यक्तित्व विकास और व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष “कुक विदाउट फायर एक्टिविटी” (Cook Without Fire Activity) का सफल आयोजन किया गया.
इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को बिना आग और रसोई गैस के उपयोग के स्वादिष्ट, पौष्टिक और सुरक्षित भोजन तैयार करने के हुनर से रूबरू कराना था, ताकि वे रसोई के संभावित खतरों और जलने के जोखिम से पूरी तरह सुरक्षित रहकर आत्मनिर्भर बन सकें.
रचनात्मकता, स्वाद और पोषण का दिखा अद्भुत संगम
प्रतियोगिता के दौरान स्कूल की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी पाक कला का शानदार प्रदर्शन किया:
- पौष्टिक सामग्रियों का उपयोग: छात्राओं ने ताजे मौसमी फलों, हरी सब्जियों, सूखे मेवों, अंकुरित अनाजों और डेयरी उत्पादों का आकर्षक संयोजन कर कई तरह के हेल्दी स्नैक्स, सलाद और ड्रिंक्स तैयार किए.
- आकर्षक प्लेटिंग और प्रेजेंटेशन: प्रतिभागियों ने न केवल स्वादिष्ट व्यंजन बनाए, बल्कि उनकी गार्निशिंग, टेबल लेआउट और खूबसूरत सजावट से निर्णायकों व शिक्षकों को खासा प्रभावित किया.
भोजन के बहाने लाइफ स्किल्स और टीम वर्क का पाठ
स्कूल प्रबंधन ने इस गतिविधि को केवल कुकिंग तक सीमित न रखकर इसे जीवन कौशल (Life Skills) से जोड़ा:
- आत्मनिर्भरता और सुरक्षा: बिना गैस-चूल्हे के भोजन बनाने की तकनीक सिखाकर छात्राओं को आपात स्थिति में आत्मनिर्भर रहने के गुर सिखाए गए.
- सहयोग और स्वच्छता: प्रतियोगिता के दौरान छात्राओं ने समूह में कार्य करते हुए आपसी तालमेल, रसोई की स्वच्छता (हाइजीन) और समय प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण मूल्य सीखे.
विद्यार्थियों में छिपी प्रतिभा की प्रशासक ने की सराहना
पूरे कार्यक्रम की देखरेख स्वयं विद्यालय के प्रशासक इंजीनियर कुमार हिमांशु कर रहे थे:
- प्रेरणादायी संबोधन: ई. कुमार हिमांशु ने कहा कि इस गतिविधि का मुख्य ध्येय बच्चों में रचनात्मकता, आत्मनिर्भरता और स्वस्थ खानपान के प्रति जागरूकता पैदा करना है. किताबी ज्ञान के साथ-साथ ऐसी व्यवहारिक गतिविधियां बच्चों में आत्मविश्वास का संचार करती हैं.
- उत्साहवर्धन: उन्होंने छात्राओं द्वारा प्रदर्शित रचनात्मकता और लगन की भूरि-भूरि प्रशंसा की और उन्हें भविष्य में भी पाठ्येतर गतिविधियों (Co-curricular activities) में इसी ऊर्जा के साथ भाग लेने के लिए प्रेरित किया.
विद्यालय के शिक्षकों ने भी छात्राओं के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें जंक फूड छोड़कर पौष्टिक आहार को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सीख दी.