स्मार्टफोन और हाई-स्पीड इंटरनेट के इस दौर में स्कूली बच्चों की जिंदगी डिजिटल गैजेट्स तक सिमट कर रह गई है. बच्चे दिन का ज्यादातर समय ऑनलाइन दुनिया में बिता रहे हैं, लेकिन इंटरनेट और सोशल मीडिया के उपयोग से जुड़े बुनियादी एटिकेट्स (शिष्टाचार व सुरक्षा नियमों) की समझ का उनमें घोर अभाव है. सही जानकारी के अभाव में बच्चे वास्तविक सामाजिक दायरे से कट रहे हैं और साइबर फ्रॉड या मानसिक अवसाद के शिकार हो रहे हैं. इसी गंभीर समस्या को देखते हुए प्रभात खबर की टीम की पहल पर पूर्णिया जिले के कसबा मध्य विद्यालय विशनपुर एवं प्लस टू हाई स्कूल परिसर में एक विशेष 'छात्र-संवाद' कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों और प्रबुद्ध शिक्षकों ने बच्चों को इंटरनेट, इंट्रानेट के सदुपयोग और 'नेतिकेट्स' (Netiquettes) के व्यावहारिक नियमों से रू-ब-रू कराया.
क्या है 'नेतिकेट्स'? ऑनलाइन दुनिया में भी जरूरी है मर्यादा
संवाद के दौरान बच्चों को आभासी दुनिया में सुरक्षित और सम्मानित रहने का पाठ पढ़ाया गया:
- धारणा का निर्माण: विषय विशेषज्ञ मिथिलेश मिश्रा ने छात्रों को समझाते हुए कहा कि इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय शालीन व्यवहार और शिष्टाचार बनाए रखना ही 'नेतिकेट्स' कहलाता है. जिस प्रकार हम वास्तविक समाज में लोगों से मिलते समय आदर और मर्यादा का ध्यान रखते हैं, ठीक उसी प्रकार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हमारी भाषा और पोस्ट हमारे व्यक्तित्व की पहचान तय करते हैं.
- कंटेंट का विवेकपूर्ण चयन: उन्होंने बच्चों को आगाह किया कि सोशल मीडिया पर किस प्रकार की सामग्री (कंटेंट) साझा की जानी चाहिए और किन भ्रामक, अश्लील या आपत्तिजनक चीजों से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए.
डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के 'गोल्डन रूल्स'
| सुरक्षा व शिष्टाचार बिंदु (Key Etiquettes) | छात्रों को दिए गए व्यावहारिक टिप्स (Practical Guidelines) |
| भाषा की मर्यादा | ऑनलाइन चैटिंग व कमेंट्स में हमेशा संयमित व आदरपूर्ण शब्दों का चयन करें; अपशब्दों से बचें |
| प्राइवेसी की सुरक्षा | अपनी या परिवार की व्यक्तिगत जानकारी, फोन नंबर या लोकेशन कभी सार्वजनिक न करें |
| टैगिंग व सहमति | बिना पूर्व अनुमति किसी मित्र या सहपाठी की फोटो पोस्ट या टैग न करें |
| अजनबियों से दूरी | सोशल मीडिया पर अज्ञात व्यक्तियों से ऑनलाइन दोस्ती न करें; संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें |
| समय सीमा निर्धारण | देर रात तक मोबाइल व इंटरनेट के उपयोग से बचें; स्क्रीन टाइम सीमित रखें |
| सृजनात्मक उपयोग | फॉलोअर्स बढ़ाने की होड़ छोड़ ज्ञानवर्धक, शैक्षणिक व रचनात्मक सामग्री ही सर्च व शेयर करें |
फॉलोअर्स की होड़ में परिवार से कट रहे बच्चे: प्रधानाध्यापकों की दो-टूक
संवाद में मौजूद शिक्षाविदों ने बच्चों में बढ़ती स्क्रीन की लत पर गंभीर चिंता व्यक्त की:
- माता-पिता से बढ़ती दूरी: कसबा मध्य विद्यालय विशनपुर के प्रधानाध्यापक सुचित कुमार पप्पू ने कहा कि आज शहर से लेकर गांव तक मोबाइल की ऐसी लत लगी है कि बगल में बैठे व्यक्ति से संवाद खत्म हो गया है. बच्चे माता-पिता के प्रति शिष्टाचार और आज्ञाकारिता भूलते जा रहे हैं. उन्होंने छात्रों को वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर वक्त बर्बाद करने के बजाय किताबों के अध्ययन, खेलकूद और सामूहिक स्वस्थ चर्चाओं में भाग लेने के लिए प्रेरित किया.
- प्रमाणिकता से दूर हो रही युवा पीढ़ी: वक्ताओं ने आगाह किया कि इंटरनेट पर आने वाली हर सूचना सच नहीं होती, इसलिए बिना सत्यापन के किसी भी खबर या वीडियो को आगे फॉरवर्ड न करें.
विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक व शिक्षाविद् रहे मौजूद
छात्र-संवाद कार्यक्रम में कई विद्यालयों के प्राचार्यों और शिक्षकों ने शिरकत की:
- विषयवस्तु पर विमर्श: शिक्षिका रचिता सेन गुप्ता और प्लस टू हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक अमित आनंद ने भी विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर अपने विचार रखे.
- शिक्षकों की सहभागिता: कार्यक्रम में नविता नंदिनी, विजेता कुमार, अर्चना कुमारी, मो. आरिफ हुसैन, श्वेता कुमारी, रश्मि कुमारी, मो. रागीव रेजा, मो. मेराज आलम, मो. इशाक आलम, ममता कुमारी, प्रभाकर देव, सुजीत श्रीवास्तव, रौशन कुमार मौजूद रहे.
- विशिष्ट अतिथि: विशेष आमंत्रण पर अन्य विद्यालयों के प्रधानाध्यापक सत्येन्द्र चौधरी, कपिल झा, धीरज कुमार, भानु प्रताप और विजय कुमार जायसवाल ने भी छात्रों का मार्गदर्शन किया.
