13 साल की उम्र में शहीद हुए ध्रुव कुंडू को दी श्रद्धांजलि, स्थायी स्मृति-चिह्न की मांग

पूर्णिया में 13 वर्ष की अल्पायु में देश के लिए बलिदान देने वाले अमर बाल शहीद ध्रुव कुंडू को विशेष स्मृति कार्यक्रम में याद किया गया. शहरवासियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उनके साहस को नमन किया और ध्रुव उद्यान में स्थायी स्मृति-चिह्न स्थापित करने की मांग का पुरजोर समर्थन किया.

Purnia Dhruv Kundu Memorial: पूर्णिया. देश की स्वतंत्रता के लिए 13 वर्ष की उम्र में बलिदान देने वाले अमर बाल शहीद ध्रुव कुंडू की स्मृति में गुरुवार को शहर के ध्रुव उद्यान में विशेष स्मृति कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहरवासियों ने हिस्सा लेकर ध्रुव कुंडू के साहस, संघर्ष और स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए बलिदान को याद किया.

पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद को किया नमन

कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों ने अमर बाल शहीद ध्रुव कुंडू को पुष्पांजलि अर्पित की. इसके बाद उनके जीवन, साहस और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को लेकर चर्चा की गई. वक्ताओं ने कहा कि नई पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन के ऐसे गुमनाम या कम चर्चित नायकों के बारे में जानकारी मिलनी चाहिए.

500 से अधिक लोगों ने किया हस्ताक्षर

'ध्रुव कुंडू स्मृति अभियान' के तहत कार्यक्रम स्थल पर हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया. आयोजकों के अनुसार 500 से अधिक नागरिकों ने हस्ताक्षर कर ध्रुव उद्यान में अमर बाल शहीद ध्रुव कुंडू के जीवन, संघर्ष और बलिदान को समर्पित स्थायी शिलापट, स्मृति-चिह्न अथवा प्रतिमा स्थापित करने की मांग का समर्थन किया.

जिला प्रशासन और वन विभाग को सौंपा जाएगा आवेदन

हस्ताक्षरों के साथ तैयार आवेदन पूर्णिया के जिला पदाधिकारी और वन विभाग के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा. आयोजकों का कहना है कि ध्रुव उद्यान में स्मृति-चिह्न स्थापित होने से यहां आने वाली नई पीढ़ी को बाल शहीद के जीवन और बलिदान की जानकारी मिल सकेगी. इससे स्वतंत्रता संग्राम की विरासत और देशभक्ति की भावना को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.

'यह पूर्णिया के नागरिकों की साझी भावना'

कार्यक्रम के आयोजक, युवा सामाजिक कार्यकर्ता एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी शौर्य राय ने कहा कि ध्रुव कुंडू की स्मृति में शुरू की गई यह पहल किसी एक व्यक्ति या संस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्णिया के नागरिकों की साझी भावना है. उन्होंने कहा कि जिस बालक ने 13 वर्ष की उम्र में देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया, उसकी कहानी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है.

सार्वजनिक स्मृति का स्थायी हिस्सा बनाने की पहल

Purnia Dhruv Kundu Memorial: कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि ध्रुव कुंडू की स्मृति केवल ध्रुव उद्यान के नाम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. उनके जीवन, संघर्ष और बलिदान को पूर्णिया की सार्वजनिक स्मृति का स्थायी हिस्सा बनाने के लिए स्मृति-चिह्न की स्थापना जरूरी है.


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लेखक के बारे में

By अखिलेश चंद्रा

अखिलेश चंद्रा प्रिंट माध्यम में 30 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं.

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