कोर्ट स्टेशन पर बनने वाले स्टोन रैक प्वाइंट को अन्यत्र ले जाने की मांग

बिहार बंगाली एसोसिएशन ने रेल मंत्री को पत्र लिख कर जतायी आपत्ति

बिहार बंगाली एसोसिएशन ने रेल मंत्री को पत्र लिख कर जतायी आपत्ति

कहा- स्टेशन पर बना स्टोन रैक प्वाइंट तो प्रदूषण की चपेट में आयेंगे लोग

पूर्णिया. बिहार बंगाली एसोसिएशन ने पूर्णिया कोर्ट स्टेशन से प्रस्तावित स्टोन रैक प्वाइंट को अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग की है और कहा है कि समस्तीपुर मंडल रेल प्रबंधक के आश्वासन के बावजूद स्टोन रैक प्वाइंट का निर्माण पूर्णिया कोर्ट स्टेशन में ही किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है. बिहार बंगाली एसोसिएशन ने कहा है कि निरीक्षण में पूर्णिया कोर्ट आए मंडल रेल प्रबंधक को एसोसिएशन की ओर से इसके लिए ज्ञापन सौंपा गया था. एसोसिएशन ने एक बार फिर अपनी मांग दोहरायी है और कहा है कि स्टोन रैक प्वाइंट को अन्यत्र स्थानांतरित कर पहले से ही स्वीकृत वाशिंग पिट, स्टेबलिंग लाइन और सींक लाइन का निर्माण शीघ्र आरम्भ कराया जाए ताकि लंबी दूरी के ट्रेन की सुविधा सुलभ हो सके.

बिहार बंगाली एसोसिएशन के राज्य उपाध्यक्ष ए.के. बोस ने यहां जारी बयान में कहा है कि समस्तीपुर मंडल के अंतर्गत पूर्णिया कोर्ट स्टेशन पूर्व मध्य रेलवे का एक महत्वपूर्ण स्टेशन है. यहां पिछले कई वर्षों से लोगों द्वारा वाशिंग पिट की व्यवस्था करने की मांग की जा रही है जिससे लंबी दूरी की ट्रेन का परिचालन पूर्णिया कोर्ट स्टेशन से हो सके. बंगाली एसोसिएशन द्वारा कुछ माह पूर्व भी एक आवेदन देकर यह बताने की कोशिश की गयी थी कि स्टोन रैक प्वाइंट का निर्माण अन्यत्र होना चाहिए ताकि स्टेशन के पास की घनी आबादी को प्रदूषण से निजात मिल सके. श्री बोस ने कहा है कि इसका इसी जगह बनना स्थानीय लोगों के स्वास्थ के हित में नहीं है जबकि, वाशिंग पिट के लिए भी जगह कम पड़ जाएगी. उन्होंने कहा है कि वाशिंग पिट नहीं बना तो पूर्णिया के लोग लंबी दूरी की ट्रेनों की सुविधा से वंचित हो जाएंगे. इसके साथ ही, सींक लाइन और स्टेबलिंग लाइन का निर्माण भी अधार में लटक जाएगा. पूर्णिया कोर्ट स्टेशन पूर्णिया शहर का एक व्यस्त रेलवे स्टेशन है लेकिन रेलवे की उदासीनता के कारण आज तक उपेक्षित है. श्री बोस ने कहा है कि विभिन्न चुनाव सभाओं में भारतीय जनता पार्टी द्वारा पूर्णिया कोर्ट स्टेशन के उन्नयन के लिए वादे भी किए गए थे पर विडम्बना है कि छह वर्ष बीत जाने के बावजूद लंबित योजनाओं को मूर्त रूप नहीं दिया जा सका है.

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