थैलेसीमिया के प्रति लोगों को किया गया जागरूक

पूर्णिया

पूर्णिया. शहर के आकाशवाणी रोड स्थित सहयोग परिसर में अध्यक्ष डॉ अजीत प्रसाद सिंह द्वारा विश्व थैलेसीमिया दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया. इसमें लोगों का स्वास्थ्य जांच, रक्त जांच करने के साथ ही थैलेसीमिया के प्रति लोगों को जागरूक किया गया. शिविर में रक्तदान के प्रति भी लोगों को जागरूक किया गया. कार्यक्रम में डॉ के के चौधरी, डा सतीश कुमार ठाकुर, डा प्रीतम कुमार, सदस्य डॉ राजेश गोस्वामी, राजा कुमार, राजीव कुमार, मीना कुमारी व राबिया ने भी सहयोग किया. इस अवसर पर डॉ अजीत प्रसाद सिंह ने बताया थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जो माता-पिता से बच्चों में जीन के माध्यम से फैलता है. बीमारी में शरीर की लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन का सही उत्पादन नहीं हो पाता है. हीमोग्लोबिन का मुख्य काम पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाना है. जब यह बनना कम या बंद हो जाता है, तो गंभीर खून की कमी (एनीमिया) हो जाती है. थैलेसीमिया मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है. अल्फा थैलेसीमिया यह तब होता है जब अल्फा ग्लोबिन जीन में गड़बड़ी होती है. बीटा थैलेसीमिया यह तब होता है जब बीटा ग्लोबिन जीन में गड़बड़ी होती है. इसमें लक्षण बहुत हल्के होते हैं या नहीं के बराबर होते हैं, लेकिन व्यक्ति वाहक होता है. यह सबसे गंभीर रूप है. इसमें जन्म के दो साल के भीतर ही बहुत गंभीर एनीमिया हो जाता है और बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है. उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया से बचाव शादी से पहले ब्लड टेस्ट अगर परिवार में किसी को थैलेसीमिया है,तो शादी से पहले कपल्स को थैलसीमिया स्क्रीनिंग करानी चाहिए. गर्भावस्था के दौरान बच्चे की जांच कर इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है.

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By ARUN KUMAR

ARUN KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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