मुख्यमंत्री गुरु शिष्य परंपरा योजना का हुआ शुभारंभ

राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, दुर्लभ और विलुप्तप्राय कला रूपों को संरक्षित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री गुरु शिष्य परंपरा योजना प्रारंभ किया गया है.

योजना के तहत युवा प्रतिभाओं को किया जायेगा प्रशिक्षित

पूणिया. राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, दुर्लभ और विलुप्तप्राय कला रूपों को संरक्षित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री गुरु शिष्य परंपरा योजना प्रारंभ किया गया है. इस योजना के तहत दुर्लभ और विलुप्तप्राय कला रूपों को संरक्षित और प्रचारित करने के लिए युवा प्रतिभाओं को विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञों और गुरुओं के मार्गदर्शन में प्रशिक्षित किया जायेगा. जिला कला संस्कृति पदाधिकारी पंकज पटेल ने बताया कि बिहार राज्य की लोक कला और शास्त्रीय कलाओं के क्षेत्र में वैसी कलाओं को शामिल किया गया है, जिन्हें संरक्षण और पोषण की आवश्यकता है. गुरुओं का चयन कला संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा विशेषज्ञ समिति के माध्यम से किया जायेगा. शिष्यों का चयन चयनित गुरुओं एवं जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी द्वारा किया जायेगा. संगत कलाकारों का चयन गुरुओं द्वारा किया जायेगा. प्रशिक्षण समापन के बाद विभाग द्वारा दीक्षांत समारोह का आयोजन किया जायेगा. इसमें गुरु एवं प्रशिक्षित शिष्यों द्वारा विधावार प्रस्तुतिकरण किया जायेगा.

कला के क्षेत्र में

1. विलुप्तप्राय लोक गाथा- गौरियाबाबा, भरथरी बाबा, दीनाभद्री, राजा सलहेश, रेशमा चूहड़मल, सती बिहुला, हिरनी-वीरनी2. विलुप्तप्राय लोकनाट्य- विदेशिया, नारदी, डोमकच, बगुली, बिरहा, ज़ालिम सिंह, चकुली, बंका, कीर्तनियां

3.विलुप्तप्राय लोक नृत्य- पाईका, कर्मा, धोबिया, झरनी, करिया झूमर, झिझिया, पावरिया, कठघोड़वा

4-विलुप्तप्राय लोक संगीत- सुमंगली, रोपनी गीत, कटनी गीत, चैता, पूरबी, संस्कार गीत5-विलुप्तप्राय लोक वाद्य यंत्र- सारंगी, विचित्रवीणा, रुद्र वीणा, ईसराज, वायलिन, शहनाई, बीन, नगाड़ा

6-विलुप्तप्राय शास्त्रीय कला/विधा- ख्याल गायन, ध्रुपद धमार गायन, पखावज, सितार, ठुमरी, दादरा, होरी, सतरिया

7- विलुप्तप्राय चित्रकला- पटना कलम, टेराकोटा, सिक्की कला, माली कला, भोजपुरी पीड़िया, भोजपुरी छापा कला

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Author: ARUN KUMAR

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