परिवहन निगम में पद है बस चालक का, पर वर्दी मिली है सिक्यूरिटी गार्ड की

हैरान है परिवहन निगम के चालक

व्यवस्था और अधिकारियों की सोच से हैरान है परिवहन निगम के चालक

आईकार्ड संग सिक्यूरिटी गार्ड वाली वर्दी पहनने से बस चालकों का इंकार

पूर्णिया. बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के बस चालक मौजूदा व्यवस्था और अधिकारियों की सोच से हैरान और परेशान हैं. उनका पद चालक का है और उन्हें सिक्यूरिटी गार्ड वाली वर्दी पहनने को विवश किया जा रहा है. निगम के बस चालक अपने शरीर पर यह वर्दी धारण करने में शर्मिंदगी महसूस कर रहे हैं. बस चालकों ने इसे बेतुका फरमान करार दिया है और इसे पहनने से परहेज कर लिया है. निगम द्वारा दी गयी वर्दी घरों के अल्मीरा में बंद पड़ी है. दरअसल, बिहार राज्य पथ परिवहन निगम में चालकों के लिए अलग ड्रेस का प्रावधान पहले से रहा है. अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग ड्रेस है. हमेशा से चालकों को उनके अनुरुप ड्रेस मिलता भी रहा है पर इस बार न जाने किस कारण से चालकों को सिक्यूरिटी गार्ड वाली वर्दी थमा दीगयी है. बस चालकों की परेशानी यह है कि इस वर्दी के एवज में बस चालकों से 3 हजार से 3500 रुपये तक वसूले गये हैं. विडम्बना तो यह है कि वर्दी के साथ-साथ आईकार्ड भी सीक्यूरिटी गार्ड का ही दिया गया है. हालांकि, कार्ड पर कलम से चालक लिख दिया गया है पर वह करीब आने से दिखता है. हैरान और परेशान बस चालकों को सिक्यूरिटी गार्ड लिखा हुआ वर्दी और आईकार्ड पहनने में शर्मिंदगी महसूस हो रही है. यही कारण है कि चालकों ने वर्दी को घर में सहेज कर रख दिया है.

आउट सोर्सिंग के माध्यम से आये हैं चालक

ज्ञात हो कि बिहार राज्य पथ परिवहन निगम बस चालक व संवाहकों की संख्या करीब एक सौ है. पूर्णिया से विभिन्न जिलों के लिए करीब 40 बसें चलती है. यह सभी चालक व संवाहक आउटसोर्सिंग के माध्यम से है. हाल के दिनों में अपनी मांगों को लेकर हड़ताल भी किये थे. जहां तीसरे दिन हड़ताल विभाग के आश्वासन पर संपन्न हुआ था. इसी हड़ताल के जरिये चालकों ने धरना प्रदर्शन के माध्यम से वेतन कटौती सहित विभिन्न मांगों को लेकर आउटसोर्सिंग और विभाग के खिलाफ हल्ला बोला था. इस दौरान चालक व संवाहकों ने सिक्यूरिटी गार्ड लिखा हुआ वर्दी देने की बात कही थी.

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कहते हैं अधिकारी

बिहार राज्य पथ परिवहन निगम बस चालक व संवाहकों को एजेंसी द्वारा सिक्यूरिटी लिखी जो वर्दी दी गयी है, वह एजेंसी ही सिक्यूरिटी गार्ड की है. अभी उक्त एजेंसी के माध्यम से ही इन कर्मियों को वेतन दिया जाता है. इसकी जानकारी मिलने पर रोक लगा दी गयी है. इसके बाद इस तरह की वर्दी चालकों को नहीं दी गयी है. संबंधित एजेंसी को हटाने के लिए विभाग को पत्र पिछले माह ही लिखा है.

अजिताभ आनंद, क्षेत्रीय प्रबंधक बिहार राज्य पथ परिवहन निगम

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