पूर्णिया जिले के बायसी अनुमंडल में बिना वैध दस्तावेज और निबंधन के संचालित स्वास्थ्य संस्थानों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है. जिलाधिकारी अंशुल कुमार के निर्देश पर शनिवार को अनुमंडल क्षेत्र में निजी नर्सिंग होम, क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब और दवा दुकानों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया गया. अचानक हुई इस कार्रवाई से स्वास्थ्य संस्थान संचालकों के बीच अफरा-तफरी की स्थिति रही.
अभियान का नेतृत्व बायसी के अनुमंडल पदाधिकारी अभिषेक रंजन ने किया. जांच टीम में ड्रग इंस्पेक्टर, बायसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी, मनरेगा शामिल थे. टीम ने अनुमंडल क्षेत्र में संचालित विभिन्न मेडिसिन दुकानों, निजी नर्सिंग होम, क्लीनिकों और पैथोलॉजी लैबों का निरीक्षण किया.
दस्तावेज नहीं मिलने पर कई संस्थान सील
प्रशासन के अनुसार जांच के दौरान कई निजी नर्सिंग होम, क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब ऐसे मिले, जिनके पास संचालन से संबंधित वैध कागजात और सरकारी निबंधन उपलब्ध नहीं थे. टीम ने स्वास्थ्य विभाग के निर्धारित मानकों के अनुपालन की भी जांच की.
जांच में मानकों के अनुरूप दस्तावेज नहीं मिलने और नियमों के विपरीत संचालन पाये जाने पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ मौके पर ही कार्रवाई की गयी. प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी-सह-प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी, मनरेगा के स्तर से ऐसे कई निजी नर्सिंग होम, क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब को सील कर दिया गया.
प्रशासन की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर बिना आवश्यक अनुमति और दस्तावेज के संस्थान संचालित करने वालों पर अब निगरानी बढ़ायी जा रही है.
एसडीओ ने कहा, लगातार जारी रहेगा अभियान
कार्रवाई के संबंध में बायसी एसडीओ अभिषेक रंजन ने कहा कि आम लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जायेगा. उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन कर संचालित होने वाले निजी नर्सिंग होम, क्लीनिक, दवा दुकानों और पैथोलॉजी लैब के खिलाफ जांच अभियान आगे भी जारी रहेगा.
एसडीओ ने चेतावनी दी कि भविष्य में भी यदि कोई संचालक निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने समेत नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जायेगी.
मरीजों की सुरक्षा पर प्रशासन का फोकस
बायसी अनुमंडल में बड़ी संख्या में लोग निजी स्वास्थ्य संस्थानों और जांच केंद्रों पर इलाज तथा जांच के लिए निर्भर हैं. ऐसे में प्रशासन की ओर से दस्तावेज, निबंधन और निर्धारित मानकों की जांच को मरीजों की सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है. अभियान के आगे बढ़ने के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच में चिन्हित संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई कितनी तेजी से होती है और वैध मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों के संचालन की स्थिति क्या रहती है.
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