पूर्णिया शहर के हृदयस्थल कहे जाने वाले बाड़ीहाट मुहल्ले में स्थित महादेव मंदिर क्षेत्रवासियों की अगाध आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र है. घनी आबादी के बीच मुख्य सड़क किनारे स्थित इस पावन धाम में न केवल स्थानीय निवासी, बल्कि उस मार्ग से गुजरने वाला हर राहगीर भी नतमस्तक होकर दिन की शुरुआत करता है.
धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने मात्र से जीवन की विपदाएं टल जाती हैं और अशांत मन को असीम आध्यात्मिक शांति मिलती है.
दर्शन मात्र से खुलते हैं भाग्य के द्वार
मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं के बीच गहरी धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं:
- बंद भाग्य खोलने की मान्यता: स्थानीय लोगों का दृढ़ विश्वास है कि बाड़ीहाट महादेव के दर्शन और पूजन से दुर्भाग्य दूर होता है तथा बंद भाग्य के द्वार खुल जाते हैं.
- सुबह से शाम तक तांता: इसी आस्था के चलते प्रतिदिन भोर से ही जलाभिषेक और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लग जाती हैं.
- दूर-दराज से पहुंचते हैं लोग: बाड़ीहाट के अलावा आसपास के कई मुहल्लों और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से भी भक्त विशेष रूप से यहां पूजन करने पहुंचते हैं, जबकि कई श्रद्धालु नियमित रूप से दैनिक जलाभिषेक का नियम निभा रहे हैं.
मन्नत पूरी होने पर रुद्राभिषेक का विशेष अनुष्ठान
इलाके के बुजुर्गों के अनुसार, महादेव मंदिर में मांगी गई कोई भी जायज मुराद कभी अधूरी नहीं रहती:
- शिव स्तुति और पाठ: मनोकामना पूर्ति के उद्देश्य से श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में बैठकर शिव चालीसा, रुद्राष्टकम और शिव स्तुति का पाठ करते हैं.
- विशेष अनुष्ठान: विशेष मन्नतों और ग्रह-बाधा शांति के लिए भक्त मंदिर में पुरोहितों के सान्निध्य में रुद्राभिषेक का विधिवत अनुष्ठान आयोजित कराते हैं.
सावन और महाशिवरात्रि पर रहता है अलौकिक माहौल
वैसे तो सामान्य दिनों में भी सुबह-शाम मंदिर में भक्तों की चहल-पहल बनी रहती है, लेकिन पर्व-त्योहारों पर नजारा भव्य हो जाता है:
- सावन में जलाभिषेक: सावन के पावन महीने में मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयकारों से गुंजायमान रहता है.
- महाशिवरात्रि पर भव्य श्रृंगार: महाशिवरात्रि के दिन बाबा का विशेष फूलों और भस्म से आकर्षक श्रृंगार किया जाता है, जहां देर रात तक महाआरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है.
