किसानों की मदद के लिए पैक्सों में बनाये जा रहे हैं कृषि यंत्र बैंक

सहकारिता विभाग अब न सिर्फ किसानों की फसलों की ही खरीद करेगा बल्कि कृषि उत्पादन को बढाने की दिशा में मददगार बनेगा.

पूर्णिया. सहकारिता विभाग अब न सिर्फ किसानों की फसलों की ही खरीद करेगा बल्कि कृषि उत्पादन को बढाने की दिशा में मददगार बनेगा. इसके लिए विभाग पंचायत स्तर पर पैक्सों के माध्यम से किसानों को कृषि यंत्रों को उपलब्ध कराएगा. इसके तहत विभाग द्वारा पैक्सों में कृषि उपकरण बैंक की स्थापना के लिए राशि उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा दी जानेवाली राशि पर अनुदान की भी व्यवस्था की गयी है. इस योजना के तहत सम्बंधित पैक्स में कृषि उपयोगी यंत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी और उसका इस्तेमाल गांव के किसान भाड़े पर लेकर कर सकेंगे. इससे एक ओर जहां किसानों को आसानी से तयशुदा रकम पर कृषि यंत्र उपलब्ध हो जायेंगे और दूसरा इससे होनेवाली आमदनी से उनके पैक्स यानि उनकी समिति की आय में बढ़ोत्तरी होगी.

प्रति पैक्स 15 लाख तय, 50 फीसदी अनुदान

कृषि यंत्र की खरीद के लिए सहकारिता विभाग प्रत्येक समिति को 15 लाख रूपये की सहायता देगी. इस सहायता राशि में 50 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था की गयी है. इस अनुसार प्रत्येक पैक्स में कृषि यंत्र बैंक बनाने में समिति को 50 प्रतिशत की ही राशि वापस लौटानी है यानि 15 लाख में से सिर्फ साढ़े 7 लाख जिसपर अतिरिक्त रूप से 4 प्रतिशत सालाना ब्याज दर का भी निर्धारण किया गया है.

87 पैक्सों का किया जा चुका है चयन

सहकारिता विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पैक्सों में कृषि यंत्र बैंक के लिए कुछ आवश्यक शर्तें निर्धारित की गयी हैं. जिनमें यंत्रों के रख-रखाव एवं सुरक्षा हेतु गोदाम की अनिवार्यता है. इसी स्थान पर जो भी कृषि यंत्र 15 लाख तक की राशि में खरीद की जा सकेगी उसका भंडारण किया जाना है. मिली जानकारी के अनुसार जिले में अबतक आहर्ता पूर्ण करनेवाले 87 पैक्सों का चयन किया जा चुका है.किसानों को सहज और सुलभ तरीके से कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के लिए विभाग की ओर से पैक्सों में कृषि यंत्र बैंक की स्थापना की जा रही है. इसके लिए 15 लाख रूपये की सहायता 50 प्रतिशत अनुदान के साथ प्रत्येक पैक्स को उपलब्ध कराया जाना है. कृषि यंत्रों में ट्रैक्टर, रोटावेटर, कल्टीवेटर, डिस्क हेरो, ट्राली, थ्रेशर, हार्वेस्टर, रीपर आदि की खरीद समिति के द्वारा की जा सकती है.

अजीत कुमार, जिला सहकारिता पदाधिकारीB

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Author: ARUN KUMAR

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