पूर्णिया : प्याज के मामले में यह सवाल खड़ा है कि चंद कदमों की दूरी पर प्याज के दाम आखिर क्यों और कैसे उछाल खा जाते हैं. मंडी के अंदर जो प्याज 55 सौ रुपये प्रति क्विंटल बिकता है वह मंडी से बाहर आते ही खुदरा बाजार में 80 रुपये प्रति किलो कैसे हो जाता है. प्रशासन के नाक के नीचे इतना बड़ा मुनाफा का कारोबार आखिर कैसे फल-फूल रहा है.
आलू प्याज के थोक कारोबारी सुरेन्द्र भगत, सुनील जायसवाल, मुकेश जायसवाल आदि बताते हैं कि खुदरा बाजार पर प्रशासनिक अंकुश नहीं होने की वजह से बाजारों में आम आदमी को महंगे दामों में प्याज खरीदना पड़ रहा है. गुलाबबाग मंडी के बड़े आढ़तियों की मानें तो प्याज उत्पादक प्रांतों में पड़ी मौसम की मार से दाम में उछाल आया था पर थोक मंडियों में बीते चार दिनों के अंदर एक से डेढ़ हजार रुपये प्रति क्विंटल तक प्याज के दाम टूट गये हैं.
अभी यहां 45 सौ से 55 सौ रुपये प्रति क्विंटल प्याज के दाम चल रहे हैं. कारोबारियों के मुताबिक गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में अक्टूबर-नवम्बर में निकलने वाली नये प्याज की फसल बारिश की वजह से प्रभावित हुई है. इस वजह से सीजन में जितना प्याज राजस्थान के अलवर और महारष्ट्र के नासिक और गुजरात के गोंडल की मंडियों में आता था उसका प्रतिशत महज बीस से पच्चीस फीसदी है.
कारोबारियों का कहना है कि नई फसल की अच्छी पैदावार को देखते हुए प्याज का स्टॉक पहले ही निकल दी गयी थी. इसी वजह से प्याज के दाम में उछाल आया. कारोबारी सुरेन्द्र भगत ने बताते हैं कि प्याज की कीमत में फिलहाल बढ़ोतरी की उम्मीद नही है. लेकिन इससे नीचे भी जाने की उम्मीद तब तक नही है जब तक प्याज उत्पादक राज्यों में मौसम अनुकूल नहीं हो जाता है.
चार आने की मुर्गी, आठ आने का मसाला: पूर्णिया. चार आने की मुर्गी, आठ आने का मसाला. यह पुरानी कहावत आप सभी ने सुनीं होगी. इन दिनों खुदरा बाजार में मसालों के भाव पर यह कहावत सटीक बैठ रही है. प्याज के भाव 80 रुपये हो गये हैं. लहसून 240 रुपये और अदरख 160 रुपये किलो बिक रहा है.
हालांकि पछले दो माह में चिकेन के दाम में कोई खास बढोतरी नहीं हुई है. लेकिन मसाले के भाव में काफी उतार-चढ़ाव हो रहा है. नॉनवेज प्रेमी अब मसाले में भी कटौती करने लगे हैं. एसडीओ सदर डा बिनोद कुमार ने कहा कि कृत्रिम रूप से अगर जमाखोरी कर कोई दुकानदार दाम बढा़ रहा है तो जिला प्रशासन कड़ी कदम उठायेगी. हालांकि अभी तक शिकायत नहीं आयी है.
हरी सब्जियों के आसमान छूते भाव: अब महज बड़े घरानों की थाली की शोभा बढ़ा रही हैं हरी सब्जियां
पूर्णिया. हरी सब्जियां मध्यमवर्गीय परिवारों के किचन से निकलकर अब बड़े घरानों की थाली की शोभा बढ़ाने लगी है. पिछले दो माह से हरी सब्जियों के भाव चढ़े हैं वह कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं. पिछले दो माह में हरी सब्जियों की कीमत में 20 से 25 रुपये का इजाफा हुआ है.
आलम यह है कि गृहिणियां अब हरी सब्जियों की जगह बेसन, सोयाबिन और मूंग के तड़के पर जोर दे रही हैं लेकिन उन चीजों के भाव भी पहले से चढ़े हुए हैं. खुदरा बाजार में हरी सब्जियों के दाम सुनते ही लोगों के हाथ-पैर फुलने लगते हैं. सब्जी मंडी में कोई भी हरी सब्जी 60 रुपये प्रतिकिलो से कम नहीं है.
स्वाद में कड़वा करैला 80 रुपये बिकने को तैयार है. बेचारी नेनूआ किसी से पीछे क्यों रहे. वह भी अपने भाव बढ़ाकर शांत व शीतल स्वभाव की कद्दू के संग बिक रही है. बेताशा दाम बढ़ने से परवल का स्वाद बेमजा हो गया है. एक-दूजे के लिए बने आलू-गोभी की सब्जी अब विरले लोगों की थाली में दिखती है. गोभी 60 रुपये से कम नहीं हो रही है और नया आलू धीरे-धीरे 40 रुपये तक पहुंच गया है.
अकेले भिंडी बाजार में 60 रुपये बिकने को बेताब है. 60 रुपये किलो बैगन खरीदने के लिए लोगों की हिम्मत जवाब दे रही है. इससे इतर टमाटर की लाली खत्म नहीं हो रही है. दो माह पूर्व 50 रुपये का टमाटर अब खुदरा बाजार में 80 रुपये तक बिकने लगा है. सलाद और चटनी में धनिया पत्ता कब गायब हो गये किसी को पता ही नहीं चला. 100 ग्राम धनिया पत्ता 50 रुपये में मिल रहा है.
