पूर्णिया : सावन के महीने में बारिश की जगह आसमान से आग बरस रहा है. दिन में कड़ी धूप से गर्मी और रात में उमस से शहरवासी बेचैन और बेहाल हैं. परेशानी की एक वजह यह भी है कि मौसम का पारा चढ़ा हुआ है और बिजली का पारा उतर गया है. बुधवार को मौसम का अधिकतम तापमान 32 और न्यूनतम 26 डिसे. रिकार्ड किया गया.
दिन भर देह को झुलसाने वाली धूप के कारण लोग बेचैन रहे. यह अलग बात है कि पुरवैया ने लोगों को काफी हद तक राहत दी. बुजुर्गों की मानें तो ऐसा पहली बार हुआ है जब सावन के महीने में बारिश का अकाल पड़ा हो और लोग जेठ जैसी गर्मी झेलते रहे हों. बुजुर्ग बताते हैं कि पिछले साल भी यह नौबत नहीं आयी थी.
सावन और भादो के महीने में लोग पहले बारिश से उब जाते थे पर अब स्थिति उल्टी हो गयी है. हालांकि बुधवार की सुबह आसमान में बादल छाए हुए थे पर सात बजे के बाद धूप कड़े तेवर के साथ आयी और आग बरसाती रही.
दोपहर तक तपिश इतनी बढ़ गयी कि सड़कों पर आवाजाही पर भी असर पड़ गया. दोपहर में वही लोग बाहर नजर आये जिनकी जरूरत ज्यादा थी. बाजारों में भी अपेक्षाकृत कम भीड़ देखी गयी जबकि सरकारी दफ्तरों की स्थिति सामान्य रही.
हो सकती है आज झमाझम बारिश
मौसम विभाग की मानें तो बुधवार की देर शाम के बाद से सुबह के बीच झमाझम बारिश की शुरुआत हो सकती है. वैसे पिछले 24 घंटे के अंदर पूर्णिया में 17.8 मिमी. बारिश हुई है.
मंगलवार का दिन काफी गर्म था जबकि शाम में बारिश होने से राहत मिली पर बुधवार का दिन फिर गर्म हो गया. मौसम विभाग की मानें तो अगले एक सप्ताह तक कहीं झमाझम बारिश तो कहीं गरज के साथ छींटे की गुंजाइश बन रही है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि सिचुएशन हमेशा चेंज होते रहता है. मौसम विभाग का मानना है कि इस महीने लगातार बारिश का भी संयोग बनता दिख रहा है.
एक बार फिर से बिजली-कट की समस्या से परेशान हैं शहर के लोग
पूर्णिया : शहर में एक बार फिर से बिजली-कट का संकट तेज हो गया है. एक तरफ भीषण गर्मी और दूसरी तरफ बिजली-कट के संकट से लोगों की मुश्किलें बढ़ गयी हैं. यह मामला शहर तक ही नहीं बल्कि अब तो गांवों में भी दिखने लगी है.
दरअसल बिजली विभाग शहर में 24 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा तो करती है लेकिन हकीकत इससे परे है. पूरे जिले में 12 से 14 घंटे ही बिजली मिल पा रही है. ग्रामीण इलाके में तो बिजली का कोई खास रूटीन ही नहीं है. शहर में हर घंटे बिजली गुल हो जाती है.
ज्यादा देर तक बिजली गुल रहने पर जब लोग बिजली विभाग को फोन पर सूचना देते है तब अधिकारी एवं कर्मचारी हरकत में आते हैं.
कई बार तो विभाग के अधिकारियों को बिजली गुल होने की खबर तक नहीं रहती है. इलाके में बिजली की देखरेख के लिए प्रतिनियुक्त अधिकारी एवं कर्मचारी अपने उच्च अधिकारी को अपनी जान बचाने के लिए तानकारी ही नहीं देते. ऐसे में उच्च अधिकारी भी जानकारी से वंचित रह जाते हैं. उपभोक्ता की सूचना के बाद ही गड़बड़ी ठीक किया जाता है.
इधर शहर में बिजली की समस्या दूर करने के लिए पुराने तार की जगह नए तार-पोल लगाने और जगह-जगह ट्रांसफार्मर लगाया जा रहा है. बिजली संकट के कारण प्रतिष्ठानों का काम भी बाधित रहता है. गांव में किसानों के खेतों में भी पटवन भी प्रभावित है. आम जनजीवन पर भी बुरा असर पड़ रहा है.
कहते हैं अधिकारी
गर्मी के मौसम को देखते हुए जगह-जगह मरम्मत का काम चल रहा है. जिससे ट्रिपिंग हो रही है. एक जगह ब्रेक डाउन हुआ था. उसकी मरम्मत करा ली गयी है. अब कोई परेशानी की बात नहीं है.
