पूर्णिया : शहर में रिक्शा चालक से लेकर गरीब व असहायों के ठहरने के लिए माकूल व्यवस्था नहीं है. रात होती है तो ये लोग सड़क किनारे किसी निजी लोगों के दुकानों के फर्श पर लेटकर समय कटाने को मजबूर हैं. ग्राउंड लेवल के इन लोगों का एक बड़ा कुनबा है जिस पर किसी की नजर नहीं है.
ज्ञात हो कि शहर के इन वर्गों पर बात सभी बनाते हैं मगर काम कोई नहीं करते. इससे भी बड़ी विडंबना तो यह है कि वर्ष 2014 में पूर्णिया नगर निगम ने रैन बसेरा को संवारने की घोषणा भी की लेकिन सूरत नहीं बदल सकी.
बस स्टैंड स्थित रैन बसेरा पहले दुकानदारों के कब्जे में था. इसकी छत खराब होने से दुकानदार हट गये. अब वह जगह यूरिनल बन गया है. बस स्टैंड के बाहर कोई यूरिनल नहीं रहने से लोग इसी घर में मूत्र त्यागते हैं.
शहर के उत्तरी छोर पर अवस्थित गिरजा चौक का रैन बसेरा दिन भर खुला एवं खाली और रात में यह स्टोर रूम बन जाता है. इसके अंदर आसपास के दुकानदारों के कुछ सामान रखे रहते हैं.
बसेरा का गेट अंदर से बंद है और शौचालय ठीक नहीं है. कहा जा सकता है कि अघोषित रूप से यह रैन बसेरा दुकानदारों के कब्जे में है. यहां सामने दुकान लगती है और वही इसका उपभोग करते हैं.
लाइन बाजार के सदर अस्पताल के निकट बने रैन बसेरा की स्थिति अन्य बसेरा से अच्छा जरूर दिखता है मगर यहां लोगों को रात गुजारने का मौका नहीं मिल पाता है.
पास के नाश्ते के दुकानदारों ने कहा कि वे ही रात में किसी तरह से इसमें रहते हैं. हालांकि यह रैन बसेरा भी दुकानदारों के लिए स्टोर रूम बना हुआ है. दूर-दूर तक पेयजल की सुविधा नहीं है.
आस्था मंदिर के सामने शहर का एकमात्र रैन बसेरा है जहां लोगों को आश्रय मिल पा रहा है. ऐसा इसलिए कि यहां सोने के लिए फर्श पर फ्रेम बना हुआ है. यहां अभी दर्जनभर लोग रह पाते हैं.
