चिकित्सक रहते तो बच जाती तीन की जान
बनकटवा : प्रत्यक्षदर्शियों कें अनुसार, स्वास्थ्य केंद्र में अगर चिकित्सक रहते तो तीन लोगों की जान बच जाती. शौचालय टंकी से 22 वर्षीय सरोज मुखिया,15 वर्षीय सचीन व 45 वर्षीय दिनेश महतो को बेहोशी की हालत में छौड़ादानो स्वास्थ्य केंद्र लाया गया. वहां न चिकित्सक मिले ,न कोई स्वास्थ्य कर्मी. लोगों को कहना था कि […]
बनकटवा : प्रत्यक्षदर्शियों कें अनुसार, स्वास्थ्य केंद्र में अगर चिकित्सक रहते तो तीन लोगों की जान बच जाती. शौचालय टंकी से 22 वर्षीय सरोज मुखिया,15 वर्षीय सचीन व 45 वर्षीय दिनेश महतो को बेहोशी की हालत में छौड़ादानो स्वास्थ्य केंद्र लाया गया. वहां न चिकित्सक मिले ,न कोई स्वास्थ्य कर्मी. लोगों को कहना था कि डा. ददन प्रसाद नामक एक डॉक्टर ने बिना देखे लोगों को मृत घोषित कर दिया, जबकि सांस चल रही थी.
दिन के दो बजे तक घटना के बाद भी कोई चिकित्सक या कर्मी अस्पताल में नही दिखे. इधर मामले मे सिकराहना एसडीओ ज्ञानप्रकाश ने बताया कि ड्यूटी से फरार चिकित्सक डा. मदन प्रसाद व अन्य कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा गया है. आवश्यकता हुई तो प्राथमिकी भी दर्ज की जायेगी.
मृतक के आश्रितों को मिला चार-चार लाख
घटना की सूचना के साथ अधिकारियों की टीम को बनकटवा के जीतपुर व छौड़ादानो भेजा गया. स्थिति के आकलन के बाद अधिकारियों ने तत्काल चार-चार लाख रुपये की सहायता मृतक के आश्रितों को दी. डीएम रमन कुमार ने बताया कि घटना दुखद है. छौड़ादानो स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की लापरवाही की बात सामने आयी है. इसको ले रक्सौल एसडीओ व सिविल सर्जन मोतिहारी को जांच कर 24 घंटे में प्रतिवेदन देने का आदेश दिया गया है. प्रतिवेदन मिलने के साथ दोषी खिलाफ कठोर कार्रवाई की जायेगी.
मरने वालों में पांच
एक ही परिवार के
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