शिक्षकों के अप्रैल-मई माह के वेतन के लिए 1050 करोड़ जारी,

बिहार सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत कार्यरत शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों के वेतन भुगतान के लिए मंगलवार को 10 अरब 50 करोड़ रुपये की राशि की स्वीकृति व विमुक्ति कर दी है

-जिलों को भुगतान प्रक्रिया तेज करने का निर्देश

संवाददाता, पटना

बिहार सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत कार्यरत शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों के वेतन भुगतान के लिए मंगलवार को 10 अरब 50 करोड़ रुपये की राशि की स्वीकृति व विमुक्ति कर दी है. शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह राशि अप्रैल और मई 2026 के वेतन भुगतान के लिए दी गयी है, जिससे राज्य भर के हजारों शिक्षकों को सीधा लाभ मिलेगा. आदेश में कहा गया है कि कुल उपलब्ध 10.54 अरब रुपये में से 10.50 अरब रुपये तत्काल जारी किये जा रहे हैं. यह राशि पंचायत राज संस्थाओं एवं नगर निकायों के अधीन कार्यरत उन शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों के लिए है, जो समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत आते हैं.

जिलावार आवंटन : बड़े जिलों को अधिक हिस्सेदारी

शिक्षा विभाग ने सभी 38 जिलों के लिए राशि का निर्धारण करते हुए विस्तृत सूची जारी की है. प्रमुख आवंटन में पूर्वी चंपारण में 57.82 करोड़ रुपये (सबसे अधिक), मधुबनी को 57.12 करोड़ रुपये, पटना को 41.17 करोड़ रुपये, मुजफ्फरपुर को 43.77 करोड़ रुपये, नालंदा को 37.64 करोड़ रुपये, वैशाली को 36.41 करोड़ रुपये व इसके अलावा अन्य जिलों को भी उनकी आवश्यकता के अनुसार राशि दी गयी है.

सीएफएमएस से होगी राशि की निकासी

विभाग ने स्पष्ट किया है कि राशि की निकासी समेकित वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (सीएफएमएस) के माध्यम से की जायेगी. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) को भुगतान की जिम्मेदारी सौंपी गयी है. साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि आवंटित राशि का लेखा-जोखा अलग से रखा जाये और उपयोगिता प्रमाण पत्र निर्धारित प्रारूप में समय पर जमा किया जाये. समग्र शिक्षा अभियान एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों की भागीदारी होती है. आदेश में कहा गया है कि यदि केंद्रांश कम प्राप्त होता है, तो उसकी भरपाई राज्य संसाधनों से की जायेगी, ताकि वेतन भुगतान में कोई बाधा न आये. शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि वेतन भुगतान में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता पाये जाने पर संबंधित जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) पूरी तरह जिम्मेदार होंगे. राशि का विचलन अन्य मदों में करने पर भी रोक लगा दी गयी है. आदेश के अनुसार, राशि खर्च होने के बाद अधिकतम 18 महीने के भीतर उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) जमा करना अनिवार्य होगा. इसके लिए बिहार कोषागार संहिता और वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By ANURAG PRADHAN

ANURAG PRADHAN is a contributor at Prabhat Khabar.

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >