Bihar STF News: बिहार पुलिस मुख्यालय में शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के डीआईजी संजय कुमार सिंह ने चालू वर्ष 2026 में 1 जनवरी से 16 अगस्त तक STF की कार्रवाई और उपलब्धियों का विस्तृत ब्योरा पेश किया. इस दौरान अलग-अलग ऑपरेशनल गतिविधियों और कार्रवाई से जुड़े आंकड़े भी साझा किए गए.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रभात खबर के रिपोर्टर राजकमल ने डीआईजी से सवाल किया कि क्या भरत तिवारी के एनकाउंटर को भी STF की मुठभेड़ की सूची में शामिल किया गया है? इस सवाल के जवाब में डीआईजी संजय कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि भरत तिवारी मामले में अभी जांच चल रही है.
भरत तिवारी एनकाउंटर पर क्या बोले डीआईजी?
डीआईजी संजय कुमार सिंह ने कहा कि भरत तिवारी से जुड़े मामले में अभी इन्वेस्टिगेशन जारी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना को लेकर सामने आ रहे विवरण फिलहाल जांच का हिस्सा हैं. साथ ही, मामले की न्यायिक जांच आयोग द्वारा भी जांच की जा रही है.
उन्होंने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि घटना को एनकाउंटर के तौर पर किस रूप में दर्ज किया जाएगा. जब तक जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस मामले को लेकर आधिकारिक निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा.
जांच पूरी होने तक STF की सूची में शामिल नहीं होगा मामला
डीआईजी के बयान से यह स्पष्ट है कि भरत तिवारी की मौत से जुड़ी घटना को फिलहाल STF की आधिकारिक एनकाउंटर या ऑपरेशनल उपलब्धियों की सूची में शामिल नहीं किया गया है. मामले में पुलिस अनुसंधान के साथ-साथ न्यायिक जांच आयोग की प्रक्रिया भी चल रही है.
जांच पूरी होने और घटना की वास्तविक प्रकृति स्पष्ट होने के बाद ही इस संबंध में आधिकारिक स्थिति सामने आ सकेगी. फिलहाल STF की उपलब्धियों के आंकड़ों में इस मामले को शामिल किए जाने की पुष्टि डीआईजी ने नहीं की है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में STF की कार्रवाई का जारी हुआ ब्योरा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार पुलिस मुख्यालय की ओर से 2026 में अब तक STF और पुलिस की विभिन्न विशेष इकाइयों की कार्रवाई से जुड़े आंकड़े और उपलब्धियां साझा की गईं. अधिकारियों ने इस दौरान अपराध नियंत्रण और कुख्यात अपराधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का भी ब्योरा प्रस्तुत किया.
वर्ष 2026 में एसटीएफ का प्रदर्शन
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पिछले आठ महीनों में एसटीएफ ने नक्सलियों और संगठित अपराधियों के खिलाफ लगातार आक्रामक अभियान चलाए हैं. इसके मुख्य आंकड़े निम्नलिखित हैं:
पुलिस मुठभेड़: वर्ष 2026 में अब तक अपराधियों और नक्सलियों के साथ कुल 19 पुलिस मुठभेड़ हुई हैं.
अपराधियों का खात्मा: इन मुठभेड़ों में कुल 3 कुख्यात इनामी अपराधी मारे गए हैं और 18 अपराधी घायल हुए हैं.
कुल गिरफ्तारियां: नक्सलियों और अपराधियों को मिलाकर कुल 1,716 गिरफ्तारियां की गई हैं.
इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी: कुल गिरफ्तार अपराधियों में से 63 ऐसे कुख्यात अपराधी हैं जिन पर सरकार द्वारा इनाम घोषित था.
टॉप अपराधियों पर शिकंजा: इस वर्ष कुल 165 टॉप-10 और टॉप-20 श्रेणी के वांछित नक्सलियों और अपराधियों को गिरफ्तार करने में सफलता मिली है.
अंतरराज्यीय कार्रवाई: बिहार के कुल 27 अपराधियों को राज्य से बाहर अन्य राज्यों से गिरफ्तार किया गया, जबकि दूसरे राज्यों में वांछित 55 अपराधियों को बिहार के भीतर धर-दबोचा गया.
नक्सली गिरफ्तारियां: एसटीएफ ने इस अवधि में कुल 38 नक्सलियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा है.
आत्मसमर्पण: कुल 2 बड़े इनामी नक्सलियों/अपराधियों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला करते हुए आत्मसमर्पण किया. इनमें 3 लाख रुपये का इनामी नक्सली सुरेश कोड़ा उर्फ मुस्तकीम और 2 लाख रुपये का इनामी अपराधी दीपक पांडेय शामिल है.
अवैध हथियारों और मिनी गन फैक्ट्रियों पर प्रहार
एसटीएफ की आर्म्स सेल ने राज्य में हथियारों के अवैध निर्माण और तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करने में बड़ी सफलता हासिल की है.
कुल अभियुक्तों की गिरफ्तारी: आर्म्स सेल द्वारा इस अवधि में कुल 112 हथियार तस्करों और निर्माताओं को गिरफ्तार किया गया है.
प्रतिबंधित व नियमित हथियारों की जब्ती: कुल 18 आधुनिक एवं प्रतिबंधित हथियार बरामद किए गए हैं, जिनमें 02 एके-47, 01 एके-56, 02 इंसास राइफल, 01 कारबाइन, 04 .315 बोर की राइफल, 05 सेमी-ऑटोमेटिक पिस्टल, 01 ग्लॉक पिस्टल, 01 .315 rifle और 01 डीबीबीएल शामिल हैं.
देसी हथियारों की बरामदगी: कुल 398 तैयार देसी हथियार और 178 अर्धनिर्मित देसी हथियार बरामद किए गए हैं.
गोला-बारूद की जब्ती: विभिन्न बोर के कुल 3,195 जिंदा कारतूस, 135 मैगजीन और 168 खाली कारतूस जब्त किए गए हैं.
हथियार तस्करों से गोला-बारूद: आर्म्स सेल की कार्रवाई में -315 बोर के 221 कारतूस, -32 बोर के 488 कारतूस, एके-47 के 21 कारतूस, 9एमएम के 64 कारतूस और 30-06 के 50 कारतूस बरामद हुए हैं.
मिनी गन फैक्ट्रियों का भंडाफोड़: राज्य में कुल 33 अवैध मिनी गन फैक्ट्रियों का उद्भेदन किया गया है.
फैक्ट्रियों से मशीनरी की बरामदगी: इन अवैध फैक्ट्रियों से भारी मात्रा में निर्माण उपकरण जब्त किए गए हैं. इनमें 110 अर्धनिर्मित पिस्टल, 05 अर्धनिर्मित कट्टा, 06 लेथ मशीनें, 22 ड्रिल मशीनें, 05 मिलिंग मशीनें, 12 ग्राइंडर मशीनें, 02 वेल्डिंग मशीनें, 41 बेस मशीनें और 51 बैरल शामिल हैं.
प्रमुख छापेमारी स्थल: एसटीएफ ने नालंदा (इस्लामपुर), खगड़िया (परबत्ता एवं मानसी), मुंगेर (शामपुर व मुफ्फसिल), भागलपुर (मधुसूदनपुर), सारण (मशरक व जलालपुर) और बांका (धोरैया व पंजवारा) जिलों में बड़ी मिनी गन फैक्ट्रियों को उजाड़ा है. खगड़िया के मानसी थाना क्षेत्र के अंतर्गत गंडक नदी के तटवर्ती दियारा इलाके में चल रही फैक्ट्री से देसी कट्टा, बेस मशीन, हैंड ड्रिल मशीन और 4 बैरल बरामद किए गए.
PLFI नेटवर्क पर चोट: नवादा जिले में कार्रवाई करते हुए एसटीएफ ने प्रतिबंधित पीएलएफआइ (PLFI) नक्सल संगठन के सक्रिय सदस्यों को एके-47 राइफल, .315 बोर राइफल, कारतूस और मैगजीन के साथ गिरफ्तार किया.
बैंक, ज्वेलरी और गोल्ड लोन लूट विरोधी विंग की कार्रवाई
इस विशेष सेल ने राज्य के भीतर और अंतरराज्यीय स्तर पर ज्वेलरी दुकानों और बैंकों में डकैती डालने वाले संगठित गिरोहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की है.
कुल गिरफ्तारियां: इस सेल ने अब तक कुल 113 शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है.
बरामदगी का विवरण: गिरफ्तार अपराधियों के पास से 8.840 किलोग्राम सोना, 44.047 किलोग्राम चांदी, 11.97 लाख रुपये की नकदी, 26 देसी कट्टा/पिस्तौल, 71 जिंदा कारतूस और 440 ग्राम हेरोइन जब्त की गई है.
सुलझाए गए प्रमुख बड़े लूटकांड
ड्रग्स सिंडिकेट पर शिकंजा
एसटीएफ की नारकोटिक्स सेल ने पूर्वोत्तर भारत के राज्यों से संचालित होने वाले अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ कड़ा अभियान चलाया है.
गिरफ्तारियां: नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल कुल 163 ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया है.
नशीले पदार्थों की जब्ती: कुल 2188 किलोग्राम 654 ग्राम मादक पदार्थ बरामद किए गए हैं.
जब्त दवाओं का ब्योरा: इसमें 5.724 किलोग्राम हेरोइन/स्मैक, 13.430 किलोग्राम अफीम, 11.5 किलोग्राम चरस/हशीश, 2062 किलोग्राम गांजा और 96 किलोग्राम डोडा (Poppy Straw) शामिल है.
नकदी बरामदगी: तस्करों के पास से भारतीय मुद्रा में ₹1,98,850 और ₹25,50,000 की नेपाली करेंसी (NC) जब्त की गई है.
वार्षिक आंकड़े (एसटीएफ/बिहार पुलिस कुल बरामदगी): संपूर्ण वार्षिक ब्योरे के अनुसार, राज्य में इस अवधि में कुल 3059 किलो 594 ग्राम गांजा, 20.041 किलोग्राम अफीम, 518 किलोग्राम 510 ग्राम डोडा, 6.038 किलोग्राम हेरोइन, 768 ग्राम कोटा व 216 पैकेट/MCCkk, 3.667 किलोग्राम स्मैक (225 पैकेट) और 17.899 किलोग्राम चरस की बरामदगी हुई है.
कोढ़ा गैंग, साइबर सेल और अपहरणमुक्त विंग की उपलब्धियां
कोढ़ा गैंग सेल: सीसीटीवी और तकनीकी विश्लेषण की मदद से अंतरराज्यीय 'कोढ़ा गैंग' के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 38 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 97 अपराधियों की पहचान की गई. इस विंग ने 51 मामलों का सफल निष्पादन करते हुए अपराधियों के पास से 197.1 ग्राम सोना, 150 ग्राम चांदी और ₹76,20,400 की भारी-भरकम नकदी बरामद की है.
कांट्रैक्ट किलर सेल (सुपारी हत्यारा निगरानी): सुपारी लेकर हत्या की साजिश रचने वाले 30 कांट्रैक्ट किलर्स को गिरफ्तार किया गया है. इनके पास से 4 हथियार, 30 जिंदा कारतूस, 2 खोखा, 250 ग्राम चरस, 100 पैकेट स्मैक, 4 मोबाइल और 2 गाड़ियां बरामद की गईं. इसमें 16 फरवरी 2026 को पटना के कुख्यात अपराधी क्यौस खान की गिरफ्तारी भी शामिल है.
साइबर क्राइम सेल: एटीएम धोखाधड़ी और वित्तीय जालसाजी से जुड़े कुल 19 मामलों का सफल निपटारा किया गया है. इसमें एटीएम फ्रॉड के 7, बैंक लोन फ्रॉड के 5, फर्जी फेसबुक और इंस्टाग्राम प्रोफाइल बनाकर "प्लेबॉय" नौकरी दिलाने का झांसा देकर ब्लैकमेलिंग करने वाले 6, व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर ठगी करने वाले 2, एपीआई (API) के माध्यम से निजी डेटा बेचने वाले 2 और अन्य जालसाजी (Forgery) के 5 शातिर अपराधी गिरफ्तार किए गए हैं.
अपहरणमुक्त सेल (Kidnapping Recovery): जिला पुलिस के संयुक्त प्रयासों से पटना, नालंदा, जमुई, मुंगेर, लखीसराय, बेगूसराय, समस्तीपुर और किशनगंज जिलों से कुल 10 अपहृत व्यक्तियों को सुरक्षित और सकुशल बरामद किया गया है.
संगीन अपराधों की रोकथाम
एसटीएफ ने जिला स्तर की डीआईयू (District Intelligence Unit) और टेक्निकल सेल के साथ मिलकर अपराध होने से पहले ही कुल 94 गंभीर संगीन मामलों (हत्या- 40, लूट/डकैती- 48, अन्य- 6) को रोककर बड़ी वारदातों को टाल दिया.
माह-वार अपराध रोकथाम की स्थिति
जनवरी: 12 संगीन अपराध टाले (हत्या- 09, लूट/डकैती- 02, अन्य- 01).
फरवरी: 11 संगीन अपराध टाले (हत्या- 06, लूट/डकैती- 05).
मार्च: 10 संगीन अपराध टाले (हत्या- 01, लूट/डकैती- 08, अन्य- 01).
अप्रैल: 12 संगीन अपराध टाले (हत्या- 03, लूट/डकैती- 08, अन्य- 01).
मई: 22 संगीन अपराध टाले (हत्या- 09, लूट/डकैती- 12, अन्य- 01).
जून: 11 संगीन अपराध टाले (हत्या- 06, लूट/डकैती- 05).
जुलाई: 13 संगीन अपराध टाले (हत्या- 06, लूट/डकैती- 06, अन्य- 01).
अगस्त (16 अगस्त तक): 03 संगीन अपराध टाले (लूट/डकैती- 02, अन्य- 01).
आधुनिक तकनीक और ड्रोन सेल का ऐतिहासिक उपयोग
नक्सल प्रभावित और दुर्गम पहाड़ी तथा दियारा क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए ड्रोन सेल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है. एसटीएफ ने 9 संवेदनशील जिलों में हवाई निगरानी (Aerial Surveillance) के तहत 423.3 किलोमीटर के क्षेत्र का डिजिटल सर्वे किया है. ड्रोन मैपिंग तकनीक की मदद से जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों में अवैध रूप से उगाई गई 99.86 एकड़ में फैली अफीम की अवैध खेती को पूरी तरह नष्ट किया गया है. ड्रोन के जरिए 45 कुख्यात अपराधियों के छिपे होने के गुप्त ठिकानों का डिजिटल नक्शा (Mapping) तैयार किया गया है.
भारत-नेपाल सीमा पर पैनी नजर: सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण जैसे सीमावर्ती जिलों में तस्करी और सीमापार नेटवर्क पर नियंत्रण रखने के लिए ड्रोन निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया है.
काली कमाई पर कड़ा प्रहार और नक्सल पुनर्वास नीतियां
ED को PMLA प्रस्ताव: एसटीएफ सक्रिय आपराधिक गिरोहों, विशेषकर भू-माफियाओं का डेटाबेस तैयार कर रही है. इनके द्वारा अपराध से अर्जित की गई अवैध संपत्तियों (Proceeds of Crime) को कड़ाई से जब्त करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को PMLA के तहत प्रस्ताव भेजे गए हैं.
नक्सल पुनर्वास और वित्तीय नाकेबंदी: बिहार सरकार की आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीति के तहत अब तक कुल 63 पूर्व नक्सलियों को सरकार की योजनाओं के लाभ स्वीकृत किए जा चुके हैं. इसके साथ ही नक्सलियों के वित्तीय स्रोतों जैसे सरकारी ठेकेदारी, ईंट-भट्ठा, अफीम की खेती, माइनिंग और तेंदू पत्ता व्यापार पर कड़ी निगरानी रखकर उनकी वित्तीय नाकेबंदी की जा रही है.
कैंपों की वापसी का प्लान: राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल होने के बाद केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के 24 कैंपों के लिए डी-इंडक्शन (वापसी) की योजना तैयार की जा रही है.
स्प्लिंटर ग्रुप्स पर नजर: नक्सलियों के छोटे और हिंसक गिरोहों जैसे TSPC, PLFI और JJMP की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है.
पुलिस बल का सुदृढ़ीकरण और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण
एसटीएफ ने न केवल अपनी ऑपरेशनल ताकत बढ़ाई है, बल्कि अन्य पुलिस बलों की दक्षता सुधारने के लिए भी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया है. इस अवधि में कुल 1,779 पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है. प्रशिक्षित किए गए जवानों में से 1,428 को एसटीएफ की आंतरिक प्रशिक्षण शाखा द्वारा और 351 अधिकारियों को उन्नत ऑपरेशनल ट्रेनिंग के लिए राज्य के बाहर भेजा गया.
देश और कर्तव्य के लिए सर्वोच्च बलिदान
अपराधियों और उग्रवादियों के खिलाफ चले इस आक्रामक सुरक्षा अभियान में एसटीएफ के दो जांबाज सिपाही कर्तव्य की वेदी पर वीरगति को प्राप्त हो गए.
शहीद श्रीराम यादव (सिपाही): 17 मार्च 2026 को पूर्वी चंपारण के चकिया थाना क्षेत्र के सिहसवा में कुख्यात अपराधी कुंदन ठाकुर गिरोह के खिलाफ मुठभेड़ के दौरान अपराधियों की गोलीबारी का बहादुरी से सामना करते हुए शहीद हो गए.
शहीद धीरज कुमार (सिपाही): 25 जून 2026 को जहानाबाद जिले के घोसी थाना क्षेत्र में अपराधियों की घेराबंदी के दौरान तैनात थे. इसी बीच उनके पास रखी सर्विस रिवॉल्वर से अचानक हुई दुर्घटनाजन्य फायरिंग (Accidental Discharge) में गोली उनके सीने में लग गई, जिससे अस्पताल में इलाज के दौरान उनका दुखद निधन हो गया.
