Smart Meter: स्मार्ट मीटर में हो रही गड़बड़ी तो यहां करें शिकायत, नहीं पड़ेगी वकील की जरूरत, खुद बहस करने की छूट

Smart meter: बिजली से जुड़ी समस्या है, समाधान नहीं हो रहा, स्थानीय अधिकारी आपकी समस्या नहीं सुन नहीं रहे हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है. आप सीधे उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (सीजीआरएफ) में आवेदन कर सकते हैं. यहां अपील के लिए न तो वकील की जरूरत पड़ेगी, न फीस लगेगी.

Smart meter: बिजली से जुड़ी समस्या है, समाधान नहीं हो रहा, स्थानीय अधिकारी आपकी समस्या नहीं सुन रहे हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है. आप सीधे उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (सीजीआरएफ) में आवेदन कर सकते हैं. यहां अपील के लिए न तो वकील की जरूरत पड़ेगी, न फीस लगेगी. आप खुद बहस कर सकते हैं.

नया इंतजाम में अब सीजीआरएफ ऑफिस नहीं, अपने डिविजन के सुविधा केंद्र पर भी आप शिकायती पत्र जमा कर सकते हैं. राज्य के 20 शहरों में उपभोक्ता निवारण फोरम (सीजीआरएफ) गठित है. बता दें कि यहां ऑन लाइन, ऑफ लाइन आवेदन देने की सुविधा उपलब्ध है.

सीजीआरएफ के फैसले से संतुष्ट नहीं है तो क्या करें?

सीजीआरएफ के फैसले से अगर आप संतुष्ट नहीं हैं तो आपको बिजली कंपनी मुख्यालय स्थित ऑम्बड्समैन (विद्युत लोकपाल) के यहां अपील करना होगा. यहां भी कोई फीस और वकील की जरूरत नहीं पड़ेगी. सुनवाई के बाद ऑम्बड्समैन अपना फैसला सुनाएंगे. इस फैसले से भी संतुष्ट नहीं है तो सीधे हाईकोर्ट जा सकते है.

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अधिकारी आदेश का पालन नहीं करते हैं तो क्या करें?

यदि सीजीआरएफ ने आपके पक्ष में फैसला सुनाया है. बिजली कंपनी के अधिकारी उसका अनुपालन नहीं कर रहे हैं तो विद्युत विनियामक आयोग में आप आवेदन दे सकते हैं. यहां फिर से सुनवाई की जाएगी. उसके बाद फैसला सुनाया जाएगा. आयोग, सीजीआरएफ का फैसला नहीं मानने पर बिजली कंपनी के अधिकारी के खिलाफ 1 लाख रुपए तक का जुर्माना भी लग सकता है.

स्मार्ट मीटर को लेकर क्या है नई व्यवस्था?

  1. बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली कंपनी को डिविजन में स्थापित सुविधा केंद्र पर सीजीआरएफ के नाम से आने वाले आवेदनों को रिसीव करने का आदेश जारी किया है. ताकि, उपभोक्ताओं को आवेदन देने के लिए बिजली कंपनी के सर्किल मुख्यालय जाना नहीं पड़े. केस एडमिट होने के बाद दोनों पक्षों को नोटिस भेज जाएगा. बिजली कंपनी के अधिकारी और उपभोक्ता फोरम के समक्ष अपना-अपना पक्ष रखेंगे.
  2. सीजीआरएफ में केस एडमिट होने के बाद समाधान के लिए विद्युत कार्यपालक अभियंता को पत्र भेजा जाएगा. कार्यपालक अभियंता को 7 दिनों के अंदर जवाब देना होगा. जवाब नहीं आने की स्थिति में सीजीआरएफ दोनों पक्षों को नोटिस भेजेगा. सुनवाई की तय तारीख और समय उपभोक्ता अपना पक्ष स्वयं रखेंगे. बुजुर्ग होने की स्थिति में उनके बच्चे भी पक्ष रख सकते हैं.

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लेखक के बारे में

अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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