सम्राट चौधरी CM की रेस में सबसे आगे क्यों? लेकिन एक सबसे बड़ा रोड़ा अब भी रास्ते में

Bihar Next CM: बिहार में CM पद को लेकर सियासी चर्चा तेज है और सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे दिख रहा है. नीतीश कुमार के इशारों, जातीय समीकरण और अनुभव ने उन्हें मजबूत दावेदार बनाया है, लेकिन ‘आयातित’ नेता की छवि और पार्टी के अंदरूनी विरोध अब भी बड़ा रोड़ा बना हुआ है.

Bihar Next CM: बिहार की सियासत में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल है- अगला मुख्यमंत्री कौन? इस सवाल के बीच सम्राट चौधरी का नाम तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हालिया बयान और बॉडी लैंग्वेज हैं. समृद्धि यात्रा के दौरान 18 मार्च 2026 को जमुई में अपने भाषण के आखिर में नीतीश ने सम्राट की ओर इशारा करते हुए कहा- ‘ये लोग कितना काम कर रहे हैं, आगे भी यही सब देखेंगे’. इसके बाद वे खुद उनके पास गए और कंधे पर हाथ रखा.

इसी तरह 13 मार्च को सहरसा में भी नीतीश ने मंच से लोगों को सम्राट के काम की सराहना करने को कहा और उनके कंधे पर हाथ रखकर उन्हें आगे बढ़ाया. इन इशारों को सियासी गलियारों में ‘सिग्नल’ के तौर पर देखा जा रहा है.

लव-कुश समीकरण में फिट बैठते हैं सम्राट

सम्राट चौधरी कुशवाहा (कोइरी) समाज से आते हैं, जबकि नीतीश कुमार कुर्मी हैं. बिहार की राजनीति में इन दोनों जातियों को ‘लव-कुश’ समीकरण कहा जाता है. राज्य में इनकी अच्छी-खासी हिस्सेदारी है और यही नीतीश की राजनीति का मजबूत आधार रहा है.

अगर BJP सम्राट को आगे करती है, तो यह वोट बैंक आसानी से उनके साथ जुड़ा रह सकता है. साथ ही, BJP और JDU दोनों की राजनीति ‘एंटी लालू’ लाइन पर रही है, जिसमें गैर-यादव OBC को एकजुट करना अहम रहा है. इस लिहाज से भी सम्राट इस रणनीति में फिट बैठते हैं.

अनुभव और संगठन में मजबूत पकड़

सम्राट चौधरी का राजनीतिक अनुभव भी उन्हें बाकी नेताओं से आगे करता है. वे 1999 में पहली बार मंत्री बने और तब से लेकर अब तक कृषि, पंचायती राज, वित्त और गृह जैसे अहम विभाग संभाल चुके हैं. फिलहाल वे बिहार में डिप्टी CM हैं और सत्ता में नंबर-2 की भूमिका में हैं. सरकार चलाने का अनुभव और प्रशासनिक पकड़ उन्हें CM की रेस में मजबूत दावेदार बनाती है.

बीजेपी को जैसी जरूरत वैसी आक्रामक शैली

सम्राट की सबसे बड़ी ताकत उनकी आक्रामक राजनीति है. वे विपक्ष पर खुलकर हमला करते हैं, खासकर लालू यादव और तेजस्वी यादव के खिलाफ. दिलचस्प बात यह है कि जब वे विपक्ष में थे, तब नीतीश कुमार पर भी उतने ही तीखे हमले करते थे. यह शैली BJP की राजनीतिक लाइन से मेल खाती है, जहां आक्रामक और स्पष्ट रुख को प्राथमिकता दी जाती है.

सबसे बड़ा रोड़ा- ‘आयातित’ नेता की छवि

हालांकि, सम्राट चौधरी की राह पूरी तरह आसान नहीं है. उनका सबसे बड़ा कमजोर पक्ष है कि वे मूल रूप से BJP के नेता नहीं रहे हैं. वे पहले RJD और JDU में रह चुके हैं और बाद में BJP में आए. पार्टी के कई पुराने नेता उन्हें ‘आयातित’ (आउटसाइडर) मानते हैं और यही अंदरूनी विरोध उनके रास्ते में बाधा बन सकता है. हालांकि, BJP ने दूसरे राज्यों में ऐसे नेताओं को भी बड़े पद दिए हैं, जो बाद में पार्टी में शामिल हुए.

सबसे आगे, पर रास्ता पूरी तरह साफ नहीं

कुल मिलाकर, सम्राट चौधरी इस वक्त बिहार में CM पद की रेस में सबसे आगे नजर आते हैं. नीतीश के संकेत, जातीय समीकरण, अनुभव और आक्रामक शैली, सब उनके पक्ष में हैं. लेकिन पार्टी के अंदर का कुछ विरोध और ‘बाहरी नेता’ की छवि अब भी उनके रास्ते की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है. यही तय करेगा कि वे वाकई CM बनते हैं या रेस में पीछे छूट जाते हैं.

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By Abhinandan Pandey

अभिनंदन पांडेय डिजिटल माध्यम में पिछले 2 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर तक का मुकाम तय किए हैं. अभी डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास करते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखते हैं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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