बिहार में बायोमेट्रिक हाजिरी का विरोध, कर्मचारी संघ ने CS कार्यालय में सौंपा मांग पत्र, जानें क्या है वजह

Bihar Biometric Attendance : बिहार में स्वास्थ्य संस्थानों में बायोमेट्रिक हाजिरी को लेकर महिला स्वास्थ्यकर्मियों के सामने आ रही व्यावहारिक समस्याओं पर संघ ने आवाज उठाई है. ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनी हकीकत को देखते हुए व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की गई है.

Bihar Biometric Attendance : बिहार चिकित्सा और जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने स्वास्थ्य संस्थानों में बायोमेट्रिक हाजिरी को लेकर व्यावहारिक परेशानियों का मुद्दा उठाया है. संघ के नेता अमित मिश्रा और दिनेश कुमार ने सीएस कार्यालय में मांग पत्र सौंपकर व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की है. उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं 24×7 चलती हैं और सीमित संसाधनों के बीच महिला स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति की अनिवार्यता कई व्यावहारिक समस्याएं पैदा कर सकती है.

बायोमेट्रिक हाजिरी के विरोध में संघ ने सौंपा मांग पत्र

बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के नेताओं अमित मिश्रा और दिनेश कुमार ने सीएस कार्यालय में मांग पत्र सौंपा. संघ ने महिला स्वास्थ्यकर्मियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति को लेकर जारी व्यवस्था पर अपनी आपत्ति दर्ज करायी और ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की मांग की.

ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वास्थ्यकर्मियों की मुश्किलों का मुद्दा

संघ नेताओं ने कहा कि सुदूर इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को 24×7 सुचारु रखना बड़ी चुनौती है. ऐसे क्षेत्रों में काम कर रही महिला स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति की अनिवार्यता को लेकर कई व्यावहारिक दिक्कतें सामने आ सकती हैं. संघ ने इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए मांग पत्र दिया है.

पटना सिविल सर्जन ने भी विभाग के सामने रखी समस्या

इस मामले में पटना के सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव को पत्र भेजकर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत महिला स्वास्थ्यकर्मियों की व्यावहारिक परेशानियों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है. 18 अगस्त 2026 को भेजे गये पत्र में बायोमेट्रिक उपस्थिति के आधार पर मानदेय भुगतान से जुड़ी समस्या का भी उल्लेख किया गया है.

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स्वास्थ्य सेवाएं 24×7, लेकिन कार्यालय समय अलग

पत्र में ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी स्थिति का हवाला दिया गया है. इसमें कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग की सेवाएं आपातकालीन व्यवस्था के तहत 24×7 संचालित होती हैं. वहीं विभागीय पदाधिकारियों और कर्मियों की सामान्य कार्यालय अवधि सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होती है. स्वास्थ्य संस्थानों में ड्यूटी रोस्टर के अनुसार 24 घंटे सेवाएं जारी रहती हैं.

बिहार में स्वास्थ्य संस्थानों पर बढ़ रहा दबाव

पत्र में राज्य की बड़ी आबादी और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत का भी उल्लेख किया गया है. आईपीएचएस मानकों के अनुसार बड़ी संख्या में स्वास्थ्य उपकेंद्रों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में विकसित करने की आवश्यकता बतायी गयी है. इसके साथ ही अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की जरूरत भी रेखांकित की गयी है.

कम संसाधनों और रिक्त पदों के बीच चल रहे कई केंद्र

पत्र के अनुसार बिहार में कई स्वास्थ्य संस्थान सीमित संसाधनों के बीच संचालित हो रहे हैं. अनेक स्थानों पर पद भी रिक्त हैं. ऐसे में मौजूदा स्वास्थ्यकर्मियों पर काम का दबाव बढ़ता है और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार जारी रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

कई स्वास्थ्य केंद्रों पर 15 हजार तक आबादी का दबाव

पत्र में स्वास्थ्य उपकेंद्रों की आबादी से जुड़ी स्थिति का भी उल्लेख किया गया है. सामान्य तौर पर एक स्वास्थ्य उपकेंद्र करीब पांच हजार की आबादी के लिए संचालित किया जाना चाहिए. लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कई केंद्रों पर 10 से 15 हजार तक की आबादी का दबाव होने की बात कही गयी है.

70 से 75 प्रतिशत उपकेंद्रों के पास भवन नहीं

ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की बुनियादी स्थिति पर भी पत्र में सवाल उठाये गये हैं. इसमें बताया गया है कि करीब 70 से 75 प्रतिशत स्वास्थ्य उपकेंद्रों के पास अपना भवन उपलब्ध नहीं है. कई स्थानों पर शौचालय और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी भी बतायी गयी है.

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महिला स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बायोमेट्रिक व्यवस्था पर व्यावहारिक सवाल

इन परिस्थितियों को देखते हुए महिला स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति की अनिवार्यता को लेकर व्यावहारिक कठिनाइयों की बात कही गयी है. संघ का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक कार्यप्रणाली और उपलब्ध सुविधाओं को ध्यान में रखकर ही उपस्थिति और मानदेय से जुड़ी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए.

अस्पताल सामान्य सरकारी कार्यालय की तरह नहीं चलते

एसोसिएशन ने कहा कि अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र सामान्य सरकारी कार्यालयों की तरह संचालित नहीं होते. यहां पदाधिकारियों और कर्मचारियों को ड्यूटी रोस्टर के अनुसार काम करना पड़ता है. आपातकालीन परिस्थितियों में निर्धारित समय के बाहर भी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करानी होती हैं.

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By आनंंद तिवारी

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