पटना के रौशन की कलाकृतियां अब रांची के म्यूजियम में लगेगी, भीषण एक्सीडेंट के बाद भी नहीं छोड़ा पैशन

राजधानी के कला एवं शिल्प महाविद्यालय से पढ़े रौशन कुमार ने साबित किया है कि जुनून के आगे कोई भी मुसीबत बड़ी नहीं. एक भीषण हादसे में गंभीर चोट लगने के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और कबाड़ से एक शानदार 'स्क्रैप आर्ट' तैयार किया है.

जुनून हो तो बड़ी से बड़ी मुसीबत भी घुटने टेक देती है. राजधानी के कला एवं शिल्प महाविद्यालय से पढ़े रौशन कुमार ने इसे सच कर दिखाया है. हालांकि, वे मूल रूप से औरंगाबाद जिले के निवासी हैं. इस साल 1 जनवरी को पटना के इनकम टैक्स गोलंबर के पास हुए भीषण हादसे में रौशन को गंभीर चोट आई और ब्लड क्लॉट हो गया. हालांकि, मौत को मात देकर ठीक हुए रौशन ने अपने पैशन को नहीं छोड़ा.

पटना में उनकी कला देखकर रांची के कृषि भवन अधिकारियों ने उन्हें बुलावा भेजा. वहां बन रहे नए म्यूजियम के लिए रौशन ने कबाड़ से किसान के सम्मान में एक शानदार ‘स्क्रैप आर्ट’ तैयार किया है. रौशन कहते हैं कि उनकी स्टोरी प्रभात खबर में छपी थी. उसे देखते हुए ही उन्हें यह अवसर मिला. रौशन के पिता बालमुकुंद रजक गांव में रहकर खेती-किसानी करते हैं.

किसान के पसीने और संघर्ष की कहानी बताती तस्वीर | Prabhat Khabar Network

किसान और हमारी थाली का रिश्ता दर्शाती अनोखी कलाकृति

रांची कृषि भवन में रौशन द्वारा बनाया गया यह स्क्रैप आर्ट किसान के संघर्ष और उसकी मेहनत को समर्पित है. इसका अंडाकार आकार जीवन-चक्र का प्रतीक है. इसके चारों तरफ लगाए गए पुराने बर्तनों और स्क्रैप से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि हमारी रोजमर्रा की थाली के पीछे किसान का अटूट पसीना और संघर्ष छिपा है.

रौशन का कहना है कि दुनिया की हर भरी हुई थाली के पीछे किसान ही खड़ा है, जो हमें केवल अन्न नहीं बल्कि स्वास्थ्य और ऊर्जावान भविष्य भी देता है.

पर्यावरण और पृथ्वी बचाने की थीम पर आधारित होती हैं कलाकृतियां | Prabhat Khabar Network

खराब बिजली उपकरणों से बनाई थी 22 फीट ऊंची कलाकृतियां

हादसे से पहले भी रौशन अपनी अद्भुत कला से नजीर पेश कर चुके हैं. उन्होंने बिजली कंपनी के खराब पड़े बेकार उपकरणों से 20 से 22 फीट ऊंची छह शानदार कलाकृतियां बनाई थीं. कला एवं शिल्प महाविद्यालय के छात्र रहते हुए उन्होंने महज तीन महीनों की कड़ी मेहनत से इन्हें तैयार किया था. पर्यावरण और पृथ्वी बचाने की थीम पर आधारित इन विशाल कलाकृतियों से प्रभावित होकर बिजली कंपनी ने इन्हें पटना के गौरीचक ग्रिड में प्रदर्शनी के तौर पर लगाया था, जिसकी खूब तारीफ हुई थी.

स्क्रैप हिरण से दिया था जल और पृथ्वी संरक्षण का संदेश

रौशन द्वारा बनाई गई इन कलाकृतियों में लोहे का इस्तेमाल कर अद्भुत कारीगरी दिखाई गई थी. इसमें एक भागते हुए हिरण की मूर्ति सबसे अनोखी थी, जो डरकर पीछे मुड़कर देखते हुए जंगल की ओर भागती नजर आती है. इसके अलावा एक अन्य कलाकृति में महिला की गोद में पृथ्वी को संजोए हुए दिखाया गया था, जो यह संदेश देती थी कि जिस तरह मां बच्चे की देखभाल करती है, उसी तरह हमें पृथ्वी की रक्षा करनी चाहिए. इसमें बिजली और जल संरक्षण का संदेश भी दिया गया था.


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लेखक के बारे में

By हिमांशु देव

हिमांशु देव सितंबर 2023 से पटना में प्रभात खबर से जुड़कर प्रिंट और डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. कला, साहित्य-संस्कृति, नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़ी खबरों पर प्रमुखता से काम किया है. महिला, युवा और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना प्राथमिकता में शामिल है. व्यक्तिगत तौर पर किताबें पढ़ना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है.

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