Bihar Diwas 2026: बिहार की सभ्यता हजारों साल पुरानी है और भारत के प्राचीन इतिहास से अगर मगध या पाटलिपुत्र को निकाल दिया जाए, तो देश के पास गर्व करने के लिए कुछ खास नहीं बचेगा. जिस धरती ने रामधारी सिंह दिनकर, डॉ राजेंद्र प्रसाद व भिखारी ठाकुर जैसे रत्न दिए, आज उसकी पहचान कुछ सतही गायकों और विवादों से जोड़ी जा रही है. यह बातें देश के मशहूर शायर अजहर इकबाल ने कही. उन्होंने युवाओं व प्रवासियों को झकझोरते हुए कहा कि जब बिहार का बौद्धिक तबका दिल्ली या बाहर जाता है, तो वह अपनी पहचान बताने में संकोच करने लगता है, जबकि यह गर्व का विषय होना चाहिए.
अजहर इकबाल ने कहा कि बिहार कोई मजाक का विषय नहीं है, बल्कि यह वह ज्ञान की भूमि है जिसने दुनिया को पढ़ना-लिखना सिखाया. आज बिहार की नकारात्मक छवि के लिए कहीं न कहीं हम खुद जिम्मेदार हैं क्योंकि हमने अपना सही चेहरा दुनिया को नहीं दिखाया. पढ़ें हिमांशु देव के साथ उनके बातचीत के अंश.
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Q. बिहार दिवस के अवसर पर पटना के मुशायरे में शामिल होना आपके लिए कितना खास है? यहां की सांस्कृतिक परंपरा को आप किस नजर से देखते हैं?
– बिहार में मुशायरों का बहुत पुराना और समृद्ध इतिहास है. मुशायरे सदियों से हमारी तहजीब और संस्कारों का हिस्सा रहे हैं. यहां आना हमेशा सुखद होता है क्योंकि बिहार दिवस इस बात का सबूत है कि हम अपनी संस्कृति का जश्न कैसे मना सकते हैं. नीतीश कुमार साहब का यह शानदार कदम है कि उन्होंने हमें अपनी पहचान पर गर्व करने का मंच दिया.
Q. आपकी शायरी में आम आदमी का संघर्ष और उम्मीदें झलकती हैं. क्या यह आज के सामाजिक माहौल का असर है?
– बिल्कुल. शायर जब तक संवेदनशील (हसास) नहीं होगा, वह शायरी नहीं कर सकता. साहिर लुधियानवी ने कहा था कि दुनिया ने तजुर्बों की शक्ल में जो मुझे दिया, वही मैं लौटा रहा हूं. समाज में जो घटित होता है, वही मेरी कविता का विषय बनता है. जो मैंने समाज से लिया, उसे एक सुंदर रूप देकर वापस कर देता हूं.
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Q. सोशल मीडिया व रील्स के जमाने में मुशायरे और शायरी की अहमियत को आप कैसे देखते हैं?
– सोशल मीडिया के फायदे भी हैं और नुकसान भी. फायदा यह कि जो कलाकार हाशिए पर थे, उन्हें मंच मिला. नुकसान यह कि नई पीढ़ी के संस्कार और कहानियां खत्म हो रही हैं. अब मां-दादी की कहानियों की जगह इंस्टाग्राम ने ले ली है, जिससे हमारी सोच संकुचित हो रही है. सोशल मीडिया सूचनाओं का भंडार है, लेकिन इसे कंट्रोल और प्रबंधित करना जरूरी है.
Q. आज के परिदृश्य में एक शायर की क्या भूमिका होनी चाहिए? सिर्फ मोहब्बत की बात या समाज से जुड़े सवाल भी?
– शायरी सिर्फ मोहब्बत के लिए नहीं होती, यह इंकलाब (क्रांति) भी लाती है. पुराने समय में जंगों के साथ शायर चलते थे जो सैनिकों में जज्बा भरते थे. शायरी सिर्फ प्रेम नहीं बल्कि करुणा, दया और क्रोध जैसी संवेदनाओं को प्रेषित करने का नाम है. यह जीवन जीना सिखाती है.
Q. आपकी नजर में बिहार की सबसे बड़ी ताकत क्या है, जिसे साहित्य में और सामने आना चाहिए?
– बिहार की सबसे बड़ी ताकत यहां का इंटेलेक्ट (बौद्धिक स्तर) है. दुनिया के सबसे बुद्धिमान लोग इसी मिट्टी से निकले हैं. बिहार ने गांधी जी के सत्याग्रह को नई दिशा दी. यहां की प्रकृति पूजा (छठ) जैसा उत्सव दुनिया में कहीं नहीं है. हमें अपनी गाड़ियों व भीड़ वाली तस्वीरों के बजाय अपनी इस महान विरासत और इतिहास को साहित्य के जरिए दुनिया को दिखाना चाहिए.
Q. नई पीढ़ी के शायरों और श्रोताओं को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
– युवाओं से मेरा निवेदन है कि अपनी जड़ों और सुनहरे इतिहास को जानें. नालंदा और विक्रमशिला के बारे में पढ़ें. जब तक आप खुद को बिहारी कहने में गर्व महसूस नहीं करेंगे, तब तक दुनिया आपका सम्मान नहीं करेगी. अपनी भाषा और संस्कृति को बचाने की जिम्मेदारी नई नस्ल की ही है.
Q. भविष्य की क्या योजनाएं हैं? क्या किसी नए प्रोजेक्ट या भोजपुरी रचना पर काम चल रहा है?
– मैं मुख्य रूप से उर्दू-हिंदी में लिखता हूं, लेकिन हाल ही में मैंने भोजपुरी की मिठास से प्रभावित होकर कुछ पंक्तियां लिखी हैं. भोजपुरी बहुत प्यारी भाषा है. मेरी कोशिश है कि अपनी चीजों को पूरी गरिमा के साथ पटल पर लाया जाए और अच्छे साहित्य को बढ़ावा दिया जाए.
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