Patna News: (बिक्रम के रवि प्रकाश की रिपोर्ट)
पटना जिले के बिक्रम क्षेत्र का स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान रहा है. यहां स्थित गांधी आश्रम और आसपास के गांवों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. आज भी यह क्षेत्र अपने गौरवशाली इतिहास की गवाही देता है.
बिक्रम में ब्रिटिश काल का सैन्य महत्व
ब्रिटिश शासन के दौरान बिक्रम में एक बड़ा सैन्य कैंप और हवाई अड्डा स्थापित किया गया था. यहां जंगी विमान, प्रशिक्षण केंद्र और बूट निर्माण फैक्ट्री तक मौजूद थी. इसके अवशेष आज भी इस ऐतिहासिक धरोहर की याद दिलाते हैं.
गांधी आश्रम बना आंदोलन का केंद्र
अंग्रेजी दमन के खिलाफ बिक्रम और आसपास के स्वतंत्रता सेनानियों ने गांधी आश्रम को अपना मुख्यालय बनाया था. यहां रणनीति बनाई जाती थी और “इंकलाब जिंदाबाद” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंजता रहता था.
गांधी, नेहरू और सुभाष चंद्र बोस का आगमन
इस ऐतिहासिक भूमि पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे महान नेताओं का आगमन हुआ था, जिससे इस क्षेत्र का महत्व और बढ़ गया.
1942 का भारत छोड़ो आंदोलन और बिक्रम
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 17 अगस्त 1942 को बिक्रम थाने पर तिरंगा फहराने का निर्णय लिया गया. हजारों की भीड़ गांधी आश्रम से थाने की ओर बढ़ी और इस दौरान अंग्रेजी पुलिस से संघर्ष हुआ.
गोलीकांड में शहीद हुए सपूत
थाने के पास हुए संघर्ष में पुलिस की गोलीबारी से कई स्वतंत्रता सेनानी शहीद हुए. रंगनाथ सिंह, त्रिवेणी सिंह और बुताई राम सहित कई वीरों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए.
अंग्रेजों का दमन और बढ़ता आंदोलन
घटना के बाद अंग्रेजों ने दमन तेज कर दिया, लेकिन इससे आंदोलन और मजबूत हुआ. अंततः स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष ने देश को आज़ादी दिलाने में योगदान दिया.
आज भी जीवित है इतिहास की याद
शहीदों की स्मृति में शहीद चौक पर स्मारक बनाया गया है, जो आज भी लोगों को उस बलिदान की याद दिलाता है. गांधी आश्रम और आसपास की धरोहरें आज भी गौरवशाली इतिहास की गवाही देती हैं.
