सरकारी स्कूलों में खेल को बढ़ावा देने की योजना फाइलों में सिमटी, मैदानों की स्थिति जस की तस
Patna News: पटना जिले के सरकारी स्कूलों में खेल प्रतिभाओं को निखारने और बच्चों को बेहतर खेल सुविधाएं देने के उद्देश्य से खेल मैदान विकसित करने की योजना बनाई गई थी। इसके तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 में जिले के 22 स्कूलों को खेल मैदान विकसित करने और समतलीकरण कार्य के लिए 22 लाख रुपये आवंटित किए गए थे। हालांकि राशि खर्च होने के बावजूद अधिकांश स्कूलों में खेल मैदानों की स्थिति आज भी बदहाल बनी हुई है।
साफ-सफाई हुई, लेकिन मैदान विकास का काम अधूरा
जानकारी के अनुसार कई स्कूलों में केवल खेल मैदान की साफ-सफाई कर औपचारिकता पूरी कर दी गई। कुछ जगहों पर गेट निर्माण का काम भी हुआ, लेकिन मैदान को व्यवस्थित रूप से विकसित करने की दिशा में कोई ठोस कार्य नहीं किया गया। नतीजतन कुछ ही महीनों में मैदान फिर से जर्जर स्थिति में पहुंच गए।
स्कूल प्रशासन का कहना है कि बाउंड्री वॉल नहीं होने के कारण बाहरी लोगों का प्रवेश और अतिक्रमण लगातार बढ़ता गया, जिससे मैदानों का रखरखाव संभव नहीं हो सका।
पटना कॉलेजिएट और मिलर हाई स्कूल की स्थिति चिंताजनक
दरियापुर स्थित पटना कॉलेजिएट हाई स्कूल में बाउंड्री वॉल नहीं होने की वजह से खेल मैदान की हालत खराब हो गई है। वहीं मिलर हाई स्कूल में बाहरी लोगों की आवाजाही और विभिन्न आयोजनों के कारण छात्र नियमित रूप से खेल की प्रैक्टिस नहीं कर पाते हैं।
क्रिकेट, फुटबॉल और वॉलीबॉल ग्राउंड बनाने की थी योजना
चयनित स्कूलों में खेल मैदान सौंदर्यीकरण योजना के तहत फुटबॉल, क्रिकेट और वॉलीबॉल के लिए अलग-अलग मैदान विकसित किए जाने थे। सूची में वैसे स्कूलों को भी शामिल किया गया था, जहां पहले से मैदान मौजूद थे और केवल उनके रखरखाव की जरूरत थी।
पटना शहर के जिन चार प्रमुख स्कूलों को योजना में शामिल किया गया था उनमें गर्दनीबाग स्थित पटना हाई स्कूल, दरियापुर स्थित पटना कॉलेजिएट हाई School, राजेंद्र नगर स्थित राजकीय बालक उच्च माध्यमिक विद्यालय और पटना सिटी स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं।
शारीरिक शिक्षकों और उपकरणों की भी भारी कमी
सरकारी स्कूलों में शारीरिक शिक्षकों की कमी भी आउटडोर खेलों के विकास में बड़ी बाधा बन रही है। बच्चों की संख्या के अनुपात में पर्याप्त शारीरिक शिक्षक नहीं हैं, जिसके कारण छात्र नियमित अभ्यास नहीं कर पाते। इसके अलावा क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों के लिए जरूरी उपकरणों की भी कमी बनी हुई है।
जिले में फिलहाल करीब 423 शारीरिक शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि नोडल शारीरिक शिक्षकों को जोड़ने के बाद यह संख्या लगभग 1100 तक पहुंचती है।
डीईओ साकेत रंजन ने क्या कहा?
“मेंटेनेंस नहीं होने से मैदान फिर जर्जर हो गए”
जिला शिक्षा पदाधिकारी साकेत रंजन ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में स्कूलों को राशि दी गई थी और स्कूलों ने खर्च भी किया। लेकिन नियमित रखरखाव नहीं होने के कारण मैदानों की स्थिति दोबारा खराब हो गई।
इंजीनियरों की टीम करेगी निरीक्षण
डीईओ ने बताया कि चयनित 22 स्कूलों में खेल मैदान विकसित करने के लिए इंजीनियरों की टीम निरीक्षण करेगी और रिपोर्ट सौंपेगी। मॉडल स्कूलों में आधुनिक खेल मैदान विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।
आउटडोर गेम्स के लिए भेजी गई राशि
उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों में पर्याप्त जगह उपलब्ध है, वहां आउटडोर गेम्स के उपकरण खरीदने के लिए राशि भेजी गई है। ऐसे स्कूलों में बच्चों को नियमित रूप से आउटडोर खेलों की प्रैक्टिस कराना अनिवार्य किया गया है।
ALSO READ: पटना आयुर्वेदिक कॉलेज के शताब्दी समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को बुलाने की तैयारी
