Bihar Road Development: पटना की सड़कों की तस्वीर तेजी से बदल रही है. राजधानी में एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर का नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है. शहर के कई हिस्सों में अब कुछ ही किलोमीटर के अंतर पर फ्लाईओवर या एलिवेटेड सड़क नजर आ जाती है.
फिलहाल पटना में करीब 8 एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर चालू हैं. इसी नेटवर्क में अब मीठापुर-महुली एलिवेटेड कॉरिडोर भी जुड़ने जा रहा है. इसका मीठापुर से सिपारा तक का काम पूरा हो चुका है।
15 मिनट में मीठापुर से पुनपुन
मीठापुर-महुली एलिवेटेड कॉरिडोर शुरू होने के बाद पटना से पुनपुन का सफर काफी आसान हो जाएगा. मीठापुर से सीधे पुनपुन करीब 10 से 15 मिनट में पहुंचने की उम्मीद है.
इस कॉरिडोर का फायदा पटना से गया, जहानाबाद, औरंगाबाद और दक्षिण बिहार की ओर जाने वाले लोगों को भी मिलेगा. पटना से गयाजी जाने में लगने वाला समय भी कम होगा.
4 लेन का है पूरा एलिवेटेड कॉरिडोर
मीठापुर-महुली एलिवेटेड कॉरिडोर चार लेन का है. इससे पटना के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी.
मीठापुर के एजुकेशन हब से रामगोविंद सिंह महुली हाल्ट तक करीब 8.86 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड का निर्माण किया गया है. इस हिस्से पर करीब 1030.59 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं.
इसके दूसरे चरण में मीठापुर-सिपारा-महुली-पुनपुन रेलवे लाइन के पूरब मीठापुर से सिपारा तक चार लेन एलिवेटेड रोड तैयार किया गया है. इसमें सिपारा के पास टू-वे आरओबी भी शामिल है.
60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार
महुली हाल्ट से पुनपुन लक्ष्मण झूला तक करीब 2.20 किलोमीटर लंबा चार लेन एलिवेटेड रोड है. मीठापुर से सिपारा, महुली होते हुए पुनपुन तक पूरा कॉरिडोर करीब 11.67 किलोमीटर लंबा है. इसकी कुल लागत करीब 1467.72 करोड़ रुपये है.
इस सड़क पर दोनों तरफ दो-दो लेन हैं. वाहनों के लिए अधिकतम 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तय की गई है.
गया-जाहानाबाद जाने वालों को भी फायदा
इस कॉरिडोर का फायदा सिर्फ पुनपुन तक जाने वालों को नहीं मिलेगा. इसके जरिए दक्षिण बिहार की ओर जाने वाले ट्रैफिक को भी बेहतर रास्ता मिलेगा.
पटना से गया, जहानाबाद और औरंगाबाद जाने वाले लोगों के लिए सफर ज्यादा सुगम हो सकता है. इससे शहर की अंदरूनी सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होने की उम्मीद है.
बिहार में पहली बार UHPFRC तकनीक का इस्तेमाल
मीठापुर-महुली एलिवेटेड कॉरिडोर की एक खासियत इसकी निर्माण तकनीक भी है. इसमें बिहार में पहली बार अल्ट्रा हाई परफॉर्मेंस फाइबर रिइंफोर्सड कंक्रीट (UHPFRC) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है.
इस तकनीक की मदद से करीब 64 मीटर लंबे स्पैन तैयार किए गए हैं. कॉरिडोर का एलाइनमेंट रेलवे ट्रैक के समानांतर रखा गया है.
साउंड बैरियर और स्ट्रीट लाइट की सुविधा
एलिवेटेड रोड पर दोनों तरफ ऊंचाई वाले गार्ड लगाए गए हैं. इसके ऊपर साउंड बैरियर भी लगाए गए हैं.
स्ट्रीट लाइट, एक्सपेंशन ज्वाइंट और रोड मार्किंग समेत कई जरूरी काम पूरे किए जा चुके हैं. इससे रात में भी सफर करने वालों को सुविधा मिलेगी.
अब दानापुर-बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर पर नजर
मीठापुर-महुली के बाद पटना के लोगों को दानापुर-बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर के पूरा होने का इंतजार है. इसकी लंबाई करीब 25 किलोमीटर होगी. इसका आधे से ज्यादा काम पूरा हो चुका है. यह कॉरिडोर दानापुर रेलवे स्टेशन से शुरू होकर बिहटा और कोइलवर तक जाएगा.
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389 पिलर पर खड़ा होगा कॉरिडोर
दानापुर-बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर में कुल 389 पिलर बनाए जा रहे हैं. दानापुर के पास आरओबी और डबल डेकर ब्रिज जैसे स्ट्रक्चर के जरिए इसे जोड़ा जाएगा.
दानापुर स्टेशन के पास चार, नेऊरागंज में दो और बिहटा एयरपोर्ट से कोइलवर तक एक रैंप बनाया जा रहा है. दानापुर वाले रैंप की ऊंचाई करीब 25 मीटर होगी.
इस परियोजना पर करीब 1969 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. इसे जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
एम्स, IIT और NIT तक पहुंच होगी आसान
दानापुर-बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद पटना के पश्चिमी हिस्से की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी. एम्स, आईआईटी और एनआईटी जैसे प्रमुख संस्थानों तक पहुंचना आसान हो जाएगा.
इसके साथ ही पटना से उत्तर प्रदेश और दिल्ली की तरफ जाने वाले लोगों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी. यानी आने वाले समय में पटना का एलिवेटेड रोड नेटवर्क शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को नई रफ्तार देने वाला है.
