न्गुगी वा थ्योंगो ने कॉलोनियल माइंडसेट के खिलाफ लड़ाई लड़ी : प्रो सुबोध

न्गुगी वा थ्योंगो ने कॉलोनियल माइंडसेट के खिलाफ लड़ाई लड़ी.

प्रगतिशील लेखक संघ ने किया न्गुगी वा थ्योंगो की स्मृति का आयोजन संवाददाता, पटना. न्गुगी वा थ्योंगो ने कॉलोनियल माइंडसेट के खिलाफ लड़ाई लड़ी. उन्होंने मार्क्सवाद को नये सिरे से समझकर अपने देश में लागू किया. उक्त बातें शनिवार को जवाहर लाल नेहरू विवि में अफ्रीकन स्टडीज के प्रोफेसर रहे सुबोध नारायण मालाकर ने महान अफ्रीकी साहित्यकार न्गुगी वा थ्योंगो की स्मृति सभा को संबोधित करते हुए कही. पटना प्रगतिशील लेखक संघ ( प्रलेस) की ओर से मैत्री शान्ति भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में पटना शहर के कई बुद्धिजीवी, साहित्यकार, रंगकर्मी मौजूद थे. कार्यक्रम का संचालन पटना प्रलेस के कार्यकारी सचिव जयप्रकाश ने किया. पटना सायंस कॉलेज में अंग्रेजी के प्राध्यापक शोवन चक्रवर्ती ने मौके पर कहा कि न्गुगी वा थ्योंगो मार्क्सवादी साहित्यकार थे. साहित्य लिखने के कारण उनको जेल जाना पड़ा, उन पर हमला किया गया, उनकी पत्नी के साथ दुर्व्यवहार किया गया. राजीव रंजना ने कहा कि व्हाइट मैंस बर्डन के सिद्धांत के तहत काले लोगों को गुलाम बनाया गया. न्गुगी वा थ्योंगो ने ”” डिकोलोनार्जिंग द माइंड”” जैसी किताब 1986 में लिखी. किताब के पहले हिस्से में वे बताते हैं कि हम गुलाम कैसे हुए और फिर दूसरे भाग में हम गुलामी से मुक्त कैसे होंगे इस पर चर्चा है. अनीश अंकुर ने अपने संबोधन में कहा कि न्गुगी वा थ्योंगो अंग्रेजी के प्रतिष्ठित लेखक थे. लेकिन अंग्रेजी छोड़कर उन्हें गिकियू भाषा में लिखने के कारण जेल जाना पड़ा. न्गुगी वा थ्योंगो का कहना था कि आप तमाम भाषाएं जानते हैं और अपनी मातृभाषा नहीं जानते तो यह गुलामी है. वे भारत के मुल्कराज आनंद तथा फैज अहमद फैज से प्रभावित थे. कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता सतीश कुमार ने कहा कि न्गुगी वा थ्योंगो का कहना था कि जब दूसरी भाषा में पढ़ाई करते हैँ तो अपनी जड़ों से कट जाते हैं. स्मृति सभा में कुलभूषण गोपाल, रवीन्द्रनाथ राय, आशीष रंजन, मनोज कुमार, सुधीर, प्रशांत सुमन, सुजीत कुमार, सतीश कुमार, राजीव रंजन, कपिलदेव वर्मा, अभिषेक विद्रोही आदि मौजूद थे. अध्यक्षता ””प्राच्य प्रभा”” के सम्पादक विजय कुमार सिंह ने की.

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Author: ANUPAM KUMAR

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