कार्यकाल का एक साल निकला, सांसदों ने अभी तक नहीं चुने आदर्श गांव

वर्ष 2024 में जीते बिहार के सांसदों ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत अभी गांवों को गोद नहीं लिया है, जबकि उनके कार्यकाल का एक साल पूरा हो गया है.

– 2024 में जीते सांसदों ने अभी तक सांसद आदर्श ग्राम का नहीं किया चयन

– वर्ष 2024 और 2019 में जीते सांसदों के चयनित गांवों का भी नहीं हुआ विकास, इस कारण बढ़ी अरूचि

मनोज कुमार, पटना

वर्ष 2024 में जीते बिहार के सांसदों ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत अभी गांवों को गोद नहीं लिया है, जबकि उनके कार्यकाल का एक साल पूरा हो गया है. ग्रामीण विकास विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 में जीते सांसदों ने ही आदर्श पंचायतों का चयन किया. वर्ष 2024 में जीते सांसदों ने अपने निर्वाचन क्षेत्रों में तीन-तीन पंचायतों का चयन अभी तक नहीं किया है. विभाग की ओर से अभी भी 2019 में जीते सांसदों के चुने गांवों में हुए विकास की ही समीक्षा की जा रही है. इस अवधि में भी चयनित 4824 में 2511 योजनाएं ही पूर्ण हो पायी हैं. बताया जा रहा है कि सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत चयनित गांवों का विकास नहीं हुआ. इस कारण सांसदों ने इसमें रूचि नहीं ली. साल दर साल सांसदों ने आदर्श ग्रामों का चयन करना छोड़ दिया.

दस साल में 6265 परियोजनाओं में 2083 ही हुईं पूर्ण

वर्ष 2014 और 2029 में जीते लोकसभा सांसद और चयनित राज्यसभा सांसदों ने 208 पंचायतों का चयन सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत किया. इन 10 वर्षों में चयनित 208 में 117 पंचायतों के लिए ही विकास योजनाएं बन पायीं. 117 पंचायतों के लिए 6265 परियोजनाओं का चयन हुआ. इनमें 2083 परियोजनाएं ही पूर्ण हो पायीं.

2014-19 में 60 पंचायतों के लिए ही बनीं योजनाएं

वर्ष 2014 से 2019 में 40 सांसदों ने 65 और राज्यसभा सांसदों ने 16 पंचायतों का चयन किया. कुल 81 में 60 पंचायतों के लिए ही योजनाएं तैयार बन पायीं. इस अवधि में 4824 में 1897 परियोजनाएं ही पूर्ण हो पायीं. लगभग 40 फीसदी ही योजनाएं पूर्ण हुईं. 48.61% योजनाओं पर कार्य अभी शुरू ही नहीं हुआ.

2019 में चयनित 1441 में 186 कार्य ही हुए पूर्ण

2019 से 2024 की अवधि में जीते लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों ने 127 पंचायतों को आदर्श बनाने के लिए चिह्नित किये. इनमें मात्र 57 पंचायतों के लिए योजनाएं बनीं. कुल 1441 परियोजनाओं में 186 ही पूर्ण हुईं. 1107 परियोजनाओं पर कार्य अभी शुरू भी नहीं हुआ है.

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By RAKESH RANJAN

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